कुपढ़ बौद्धिकता का होरहा! – अखिलेश सिंह

अखिलेश सिंह गंभीर अध्येता व अवधी लोक-जीवन में पगे हुए युवा कवि हैं। पिछले ब्लॉग में नीलिमा चौहान जी ने होलिका दहन की स्त्रीवादी पड...

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होलिका- पितृसत्ता का उन्मादी नृत्य – नीलिमा चौहान

'पतनशील पत्नियों के नोट्स' जैसी विचारोत्तेजक और बहुचर्चित किताब की लेखिका नीलिमा चौहान ने होली की 'परंपरा' को स्त्री दृष्टि से देख...

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