{"title":"30%","description":null,"products":[{"product_id":"9788119745111","title":"Jungle ki Kahaniyan | जंगल की कहानियाँ By Munshi Premchand","description":"\u003cp\u003eजंगल की कहानियाँ - आपने सर्प मणि के बारे में ज़रूर सुना होगा लेकिन यह कहानी उससे ज्यादा मज़ेदार लगेगी। एक भालू ने अपने मालिक और कारिंदे की जान बचायी ।\u003c\/p\u003e","brand":"The Kid Books","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":54156813107492,"sku":"9788119745111","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":true},{"title":"Hardcover","offer_id":54156813140260,"sku":"9788169235570","price":346.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745111.jpg?v=1789982955"},{"product_id":"9788195124114","title":"Leave Your Worries Behind By Sanskriti Sharma Singh","description":"\u003cp\u003eMental health issues are most significant in preteens and teens. Since these are the transforming years, both physically and mentally, children face a myriad of issues they need help with. If we could understand that a child's worries are real and require genuine and empathetic attention, we could provide these young minds the guidance and support to grow into confident and self-reliant adults. Recognising this glaring need, we have brought this book to help preteens and teens deal with a wide variety of issues that may cause worries in their life. This book includes guidelines and tips, self-help activities, and worksheets that are designed to enhance self-awareness and reduce stress. The actions required to leave your worries behind may seem hard at first but will get better with practice. All you have to do is put your mind to it, be persistent, and have faith in yourself. Leave Your Worries Behind: Stress Management for Pre-teens and Teens by Sanskriti Sharma Singh is a practical and insightful guidebook for adolescents who are dealing with stress and anxiety in their daily lives. The book offers a range of effective stress management techniques, including mindfulness, meditation, and positive thinking. Through relatable anecdotes and easy-to-follow exercises, the author helps the reader to identify the sources of their stress and provides practical tips to overcome them. The book aims to empower young people to take control of their emotions and develop healthy coping mechanisms, thereby improving their overall well-being. \"Leave Your Worries Behind\" is a valuable resource for parents, educators, and mental health professionals working with teenagers. It provides a comprehensive guide for helping young people navigate the challenges of adolescence and build resilience in the face of adversity.\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639392891172,"sku":"9788195124114","price":139.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788195124114.jpg?v=1789983132"},{"product_id":"9788119745371","title":"Munshi Premchand ki Baal Kahaniyan | मुंशी प्रेमचंद की बाल कहानियाँ By Munshi Premchand","description":"\u003cp\u003eमुंशी प्रेमचंद की बाल कहानियाँ झूरी के दोनों बैल- हीरा और मोती, बड़े मेहनती, आज़ाद ख़याल और स्वाभिमानी थे। गया गुल्ली-डंडा के खेल में तब तक हारता है जब तक खेलता नहीं। खेलने लगता है तो लोग दाँतों तले ऊँगली दबा लेते हैं। राजा का हाथी पागल नहीं था, उसे प्रेम, सम्मान और आज़ादी चाहिए। कल्लू कुत्ता तो कमाल है। ईदगाह का हामिद अपने चिमटे के साथ कहानियों का अमर किरदार है। मिट्टू एक बन्दर का नाम है, जो अपनी बुद्धिमत्ता से सबका दिल जीत लेता है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"The Kid Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639394070820,"sku":"9788119745371","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745371_6b82dece-f948-4bfa-84fe-2bbfda8da1ba.jpg?v=1789983205"},{"product_id":"9788119745531","title":"Professor Ki Diary | प्रोफेसर की डायरी By  Dr Laxman Yadav","description":"\u003cp\u003eयह किताब डायरी, नोट्स और टिप्पणियों की शैली में अपने समय की तफ्तीश करती है। इसमें समाज और राजनीति की बड़ी परिघटनाएं हैं तो इसके बीच बनते हुए एक प्रबुद्ध नौजवान की कहानी भी है। यह आज़मगढ़ के पिछड़े किसान परिवार में पैदा होता है। इलाहाबाद और दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ायी करता है। दशक भर से ज़्यादा दिल्ली के एक कॉलेज में अध्यापन करता है। उसके कंधों पर गरीब परिवार की अपेक्षाओं और अपने सपनों का वज़न है। वह अकेला है। वह असमंजस, असुरक्षा और अनिश्चितता से घिरा हुआ है। वह डरा हुआ है। मगर वह किताबों को नौकरी पाने का जरिया नहीं बनाता, उनसे अपने समाज को समझने का नज़रिया हासिल करता है। सत्ताएँ उसे डराती हैं तो वह डरने की बजाय दुस्साहसी होता जाता है। धीरे-धीरे उसकी समझ, दायित्वबोध और लोकप्रियता का दायरा बढ़ता जाता है। वह क्लास के छात्रों से सुदूर ग्रामीण लोगों तक का प्रोफ़ेसर बन जाता है। यह फिक्शनल है, क्योंकि इसमें संज्ञाएँ बदल दी गयी हैं. यह नॉनफ़िक्शन है, क्योंकि शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति, सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ रत्ती-रत्ती सही हैं। इसमें इसमें कथा, संवाद और सटायर है तो वक्तृता और विश्लेषण की चमक भी। इसमें वह सब है, जो एक पठनीय किताब में होना चाहिए।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639394857252,"sku":"9788119745531","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745531.jpg?v=1789983323"},{"product_id":"9789392088780","title":"Sapiens A Graphic History Volume - 2 | सेपियंस चित्र इतिहास भाग -2 By Yuval Noah Harari","description":"सेपियन्स भाग दो सभ्यता के स्तम्भ यह अद्भुत चित्र इतिहास... बौद्धिक, मज़ेदार और एक मानवजाति के बतौर हमारी वास्तविकता की गहनतम उद्भावना है - बिग इशू जीवंत, आकर्षक... और मनुष्यता के उलझे हुए इतिहास की इतनी सुगम प्रस्तुति कि कोई भी इसका आनंद ले सकता है -बी.बी.सी. हिस्ट्री मैगज़ीन यह इंसान के आदिम इतिहास से बेहद \u003cp\u003eकल्पनाशील और खिलंदड़े ढंग से गुज़रना है - स्पेक्टेटर ख़ूबसूरत रूपांतरण...यह किताब बेहतरीन चित्रांकन से ज़रिए मानव जाति की कहानी सुनाती है तथा विज्ञान और इतिहास को जोड़कर हमें यह समझने में मदद करती है कि इंसान इस धरती पर बसे कैसे - बी.बी.सी. साइंस फोकस मैगज़ीन यह हमारे दिमाग के जालों को साफ़ करती है और उसे उजाले से भर देती है, जिससे हम दुनिया को नयी नज़रों से देखने लगते हैं - संडे टाइम्स सेपियन्स इतनी दिलचस्प और विचारोत्तेजक इसलिए है क्योंकि यह उलझे और व्यापक इतिहास के कुछ केन्द्रीय विषयों पर बात करती है और इस अद्भुत मानव सभ्यता की पुनर्रचना के लिए तैयार करती है। यह इस बात का एक प्ररिप्रेक्ष्य देती है कि हम कितने कम समय से इस धरती पर हैं - बराक ओबामा हरारी इतनी आसानी से हमें हमारा इतिहास बताते हैं कि एक बार इस किताब को उठाने के बाद रखना मुश्किल होगा। मैं उन सबको यह किताब पढ़ने के लिए कहूँगा जो मनुष्य के इतिहास और उसके भविष्य में रुचि रखते हैं - बिल गेट्स अविश्वसनीय रूप से बेहतरीन किताब - क्रिस इवांस चित्र इतिहास\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639396626724,"sku":"9789392088780","price":699.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789392088780.jpg?v=1789983975"},{"product_id":"9789392088162","title":"Sapiens A Graphic History Volume - 1 | सेपियंस चित्र इतिहास भाग -1 By Yuval Noah Harari","description":"\u003cp\u003eइस महागाथा का यह पहला खंड युवाल नोआ हरारी की अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तक पर आधारित और खूबसूरती से रेखांकित मानव जाति का चित्र इतिहास है। यह कहानी बताती है कि कैसे तुच्छ बन्दर पृथ्वी का शासक बन गया, जो आज परमाणु विखंडन, चाँद तक उड़ने और जीवन के गुणसूत्रों तक को बदलने की क्षमता रखता है। हरारी बतौर मार्गदर्शक, कुछ और किरदार जैसे आद्य ऐतिहासिक बिल, डॉ. फ्रिक्शन और जासूस लोपेज़ के साथ आप इतिहास के बीहड़ में भ्रमण के लिए आमंत्रित हैं। मनष्यु का उद्विकास एक रियलिटी टीवी शो की तरह कल्पित किया गया है। सेपियंस और नियंडरथल्स के मुठभेड़ को प्रसिद्ध आधुनिक कलाकृतियों के ज़रिए कहा गया है तथा मैमथ और घुमावदार दांतों वाले बाघों की\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eविलुप्ति को जासूसी मूवी की तरह दिखाया गया है। सेपियंस: चित्र इतिहास एक विलक्षण रचना है— मनुष्यता की विलक्षण मजेदार कथा, हाज़िरजवाबी की तनक, हास्य और ऊर्जा से भरपूर ।\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639396692260,"sku":"9789392088162","price":769.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789392088162.jpg?v=1789984025"},{"product_id":"9788119745029","title":"Life Skills for Career | लाइफ़ स्किल्स फ़ॉर करियर By Sushil Kumar Pare","description":"\u003cp\u003eअगर करिअर को लेकर गंभीर हैं तो याद रखिए - पहले हम आदतें बनाते हैं फिर आदतें हमें बनाती हैं। इसलिए जितनी जल्दी अपनी आदतों पर काम करना शुरू कर देंगे, उतनी जल्दी करियर का ग्राफ़ उठने लगेगा । सफलता न तो डिग्री में छिपी है न वाक् चातुर्य में, सफलता छोटी-छोटी बातों की महीन बुनाई वाली एक नाजुक चादर है। करियर की बुलंदियों तक पहुँचने के लिए प्रयासरत करोड़ों युवाओं के लिए उपयोगी हैंडबुक है यह किताब ।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639402393892,"sku":"9788119745029","price":209.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745029.jpg?v=1789985910"},{"product_id":"9788119745982","title":"Champak Story Box Bhaag-3 | चंपक स्टोरी बॉक्स भाग-3","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eचंपक स्टोरी बॉक्स — भाग 3\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअपने परिवार और दोस्तों की कहानियाँ अनबॉक्स करें! चंपक के भाग 3 में अपने बच्चों के साथ एक नई कहानी की यात्रा पर निकलें। सरल हिंदी भाषा और रंगीन चित्रों के साथ यह पुस्तक छोटे पाठकों के लिए आदर्श है।\u003c\/p\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003eकालजयी चंपक कहानियाँ\u003c\/strong\u003e — 50+ वर्षों से बच्चों की पसंदीदा\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003eसरल हिंदी भाषा\u003c\/strong\u003e — 5-12 वर्ष के बच्चों के लिए उपयुक्त\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003eरंगीन चित्र\u003c\/strong\u003e — पढ़ने का अनुभव आनंददायक बनाते हैं\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003eनैतिक कहानियाँ\u003c\/strong\u003e — अच्चे संस्कार और मूल्य विकसित करती हैं\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\u003cstrong\u003eपेपरबैक\u003c\/strong\u003e\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003chr\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eChampak Story Box — Vol. 3 (Hindi)\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eEmbark on a new adventure with your children! Champak Vol. 3 brings beloved characters and heartwarming stories that spark imagination and build values. Loved by millions for over 50 years.\u003c\/p\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e📚 Timeless Champak stories — a trusted name for 50+ years\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e🗣️ Simple Hindi — perfect for kids aged 5–12\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e🎨 Colorful illustrations to make reading fun\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e💡 Moral tales that build character and values\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e🎁 A wonderful gift for young readers\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639402885412,"sku":"9788119745982","price":206.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745982-_1.jpg?v=1787298841"},{"product_id":"9788197664526","title":"Hashtag | हैशटैग By Gautam Rajrishi","description":"\u003cp\u003e\u003cmeta charset=\"UTF-8\"\u003e\u003cspan\u003eकड़कती धूप-सा पिता । नर्म छाँव-सी माँ। एक सकुचाया-सा लड़का । एक धक-सी गोरी लड़की । और एक अजीब-सी प्रेम कहानी । एक ऐसी कहानी जिसमें प्रेम तो तरतीब से सिमटा हुआ है, लेकिन कहानी बेतरतीब-सी जाने कहाँ से कहाँ तक फैली हुई है ! # पटना साइंस कॉलेज के केमिस्ट्री लैब से लेकर देहरादून इंडियन मिलिट्री एकेडमी के चेटवुड परेड-ग्राउंड तक । # बिहार के विधान-सभा चुनाव से लेकर भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक तक । # शाहरुख़ ख़ान की 'दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे' से लेकर सलमान ख़ान की 'सुल्तान' तक। कहानी, जो अपनी तरतीब सी बेतरतीबी में 'हमने कलेजा रख दिया- चाकू-की-नोक-पर' से उठती है तो फिर 'ऐसी-नज़र-से-देखा-उस- ज़ालिम ने चौक पर ही जाकर गिरती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639403016484,"sku":"9788197664526","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788197664526-_1.jpg?v=1787298849"},{"product_id":"9789348497239","title":"Khud Se Behtar | खुद से बेहतर By Naveen Chaudhary","description":"\u003cp\u003eनौकरी पाने की क्षमता एक ज़रूरी कौशल है और नवीन ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है। व्यक्तिगत अनुभवों से उपजी यह किताब उन युवाओं के लिए अत्यधिक मूल्यवान है, जो खुद को बेहतर बनाना चाहते हैं और नौकरी के लिए तैयार होना चाहते हैं । यह ख़ुद के आकलन और कौशल विकास के जरिए वर्कप्लेस पर सफल होने के लिए बेहतरीन गाइड है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003e-बसंत राठौड़ सीनियर वाइस प्रेसिडेंट - स्ट्रेटजी ब्रांड एंड बिजनेस डेवलपमेंट, दैनिक जागरण \u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eबदलते वक्त के साथ न हमारा पाठ्यक्रम बदला न परीक्षाएँ । पर नये युग में रोजगार के अवसर और योग्यताएँ लगातार बदल रही हैं। पात्रता की परिभाषा भी । आज के युवाओं को जिन सॉफ्ट स्किल्स की आवश्यकता है उनको विकसित करने में नवीन चौधरी की ये पुस्तक एक बेहतरीन गाइड का काम करेगी। नवीन का अपना जीवन ही इसका उदाहरण है। उन्होंने जो कुछ सीखा है इस पुस्तक में उड़ेल दिया है, ऐसी भाषा में कि जैसे कोई साथी समझाए इस नई दुनिया को नेविगेट करना। सहज, अति सुंदर और अत्यंत उपयोगी । \u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003e- कमलेश सिंह सलाहकार, इंडिया टुडे ग्रुप\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639403082020,"sku":"9789348497239","price":192.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789348497239.jpg?v=1789986065"},{"product_id":"9788119745357","title":"Cyber Crime ki Sacchi Kahaniyaan | साइबर क्राइम की सच्ची कहानियां By Amit Dubey","description":"\u003cp\u003e\u003cmeta charset=\"UTF-8\"\u003e\u003cspan\u003eवह जानता है कि आप क्या खोज रहे हो वह आपको सुन सकता है, देख सकता है कि क्या कर रहे हैं और क्या करने वाले हैं ! आपको लगता है कि आप अपने फुलप्रूफ़ घर या ऑफ़िस में बैठे हैं, लेकिन असल में आप एक ग्लास हाउस में क़ैद हैं। वह एक फ़ोन कॉल से आपका एकाउन्ट खाली हो सकता है। एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल से आपको डील किया जा सकता है। एक कूरियर से आप लाखों गवा सकते हैं। एक ईमेल से आपकी जिंदगी तबाह हो सकती है । इस किताब में वे केसेज़ हैं, जिन्हें अमित दुबे ने ख़ुद सुलझाया है। इसमें से कई के बारे में तो आप पहले से जानते होंगे, लेकिन यह जानना आश्चर्यजनक होगा कि अमित दुबे ने इसे कैसे हल किया। यह किताब सिर्फ़ मनोरंजन के लिए मत पढ़िए, इसलिए पढ़िए कि आप क्रिमिनल्स का शिकार बनने से बच सकें।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Regular Book","offer_id":54156798198052,"sku":"9788119745357","price":209.3,"currency_code":"INR","in_stock":true},{"title":"Author Signed Book","offer_id":54156798230820,"sku":"9788119745358","price":209.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745357.jpg?v=1789986195"},{"product_id":"9789348497949","title":"Ghar Ke Vaaste | घर के वास्ते By Swayam Srivastava","description":"\u003cp\u003eयह लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का पहला काव्य संग्रह है। इसके हर गीत और नज़्में पहले ही लोगों की ज़ुबान पर हैं। स्वयं श्रीवास्तव अपने समय की असल समस्याओं को उठाते हैं। उनकी कविताओं में युवा मन की बेकरारी, बेकारी, प्रेम, असफलताबोध और सौन्दर्याकांक्षा मिलेगी। जब उनकी हिन्दुस्तानी जुबान में आप इन्हीं चीज़ों को सुनते हैं तो एक ही बात जेहन में कौंधती है— “देखना तक़रीर की लज़्ज़त कि जो उसने कहा मैं ने ये जाना कि गोया ये भी मेरे दिल में है”।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639404032292,"sku":"9789348497949","price":139.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789348497949.jpg?v=1789986275"},{"product_id":"9789348497185","title":"Look Around | लुक अराउंड By Vijender Chauhan","description":"\u003cp\u003eदुनिया बदल रही है, ब्यूरोक्रेसी बदल रही है और ब्यूरोक्रेट चुनने का एग्ज़ाम भी बदल रहा है । यह किताब इसी नये समीकरण यानी यूपीएससी 2.0 पर बात करती है और उसके लिए खुद को तैयार करने की तरकीबें बताती है। यह किताब मोटिवेशन की पारंपरिक किताबों से अलग अपने आसपास की वास्तविक दुनिया और खुद को समझने की नज़र देने वाली किताब है। इसका संदर्भ बेशक यूपीएससी है लेकिन असल में यह पढ़ने के तरीके और व्यक्तित्व तराशने का हुनर देने वाली किताब भी है। सो अगर खूब पढ़ाई के बावजूद सिलेक्शन से दूर हैं तो परीक्षा पर नहीं अपनी पढ़ाई के तरीके पर सोचना होगा । अगर जानकारी के बावजूद इन्टरव्यू में कम नंबर आते हैं तो आपको अपनी अभिव्यक्ति पर काम करना होगा । अगर आप बार-बार डीमोटिवेट होते रहते हैं तो अपने सोचने के तरीके पर सोचने की ज़रूरत होगी । लेकिन यह सब किया कैसे जाता है? यही तो यह किताब सिखाती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639404818724,"sku":"9789348497185","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/Untitled-design-1-_1.png?v=1791888955"},{"product_id":"9789348497208","title":"Neend Ka Baksa | नींद का बक्सा By Manoj Kumar Jha","description":"\u003cp\u003eआकाश में तारे टिमटिमा रहे हैं तो नीचे घास पर जुगनू । अक्षर किताबों से निकल भागे, नदी पार की लेकिन पहुँचे भी तो कहाँ - काँटों के गाँव । समंदर, नदी, नहर और बाल्टी सबमें पानी है। अपनी अपनी जगहों से पानी और पानी की बातें हो रही हैं। उधर फूलों के रंग तुमसे कुछ कहने को हैं । सपने में लाहौर जाकर कुल्फी खा लो और सपने में ही घर लौट आओ। ऐसी प्यारी और जादूभरी कविताएँ पढ़नी हैं ? 'नींद का बक्सा' घर ले जाओ और चुपके से खोलकर देखो। इसमें जितनी सुन्दर कविताएँ हैं उतने ही सुन्दर चित्र। गौर से देखो तो इस बक्से के चित्र और कविताएँ बातें करती दिखेंगी।\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639405965604,"sku":"9789348497208","price":122.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789348497208-_1.jpg?v=1787298943"},{"product_id":"9789348497109","title":"Rashtra Nirman Mein Adivasi | राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी By Dr Jitendra Meena","description":"\u003cp\u003e*राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी* लेखक: डॉ. जितेंद्र मीणा यह पुस्तक उनके लिए है: जो इतिहास को सिर्फ विजेताओं की कथा नहीं मानते जो भारत की सामूहिक स्मृति में आदिवासियों की उपस्थिति दर्ज करना चाहते हैं जो वैकल्पिक और समावेशी विमर्श की तलाश में हैं *\"इतिहास में किसी को नज़रअंदाज़ करना, वर्तमान में उसकी हिस्सेदारी छीनने का सबसे महीन तरीका होता है।\"* यह पुस्तक उसी ऐतिहासिक अन्याय के विरुद्ध एक सशक्त हस्तक्षेप है- जो सदियों से भारत के आदिवासी समुदायों के साथ होता आया है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक फैले इन समुदायों ने अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ सबसे शुरुआती और सबसे दीर्घकालिक विद्रोह किए, लेकिन मुख्यधारा के इतिहास में उन्हें वह स्थान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। ‘राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी’ सिर्फ एक इतिहास पुस्तक नहीं, बल्कि एक वैचारिक यात्रा है जो हमें भारत के भूले-बिसरे जननायकों से मिलवाती है। यह किताब पूछती है- क्यों आदिवासी विद्रोह, बलिदान और संघर्ष हमारी ऐतिहासिक चेतना का हिस्सा नहीं बन सके? लेखक डॉ. जितेंद्र मीणा इतिहास के प्रोफ़ेसर और सामाजिक विमर्शकार हैं। उन्होंने प्रमाणों और वैकल्पिक इतिहास दृष्टि से भारत के हर हिस्से से आदिवासी संघर्ष की बहुरंगी छवियाँ प्रस्तुत की है। यह पुस्तक न केवल पाठकों को एक भुला दिए गए इतिहास से जोड़ती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आदिवासी भारत के राष्ट्र-निर्माण में कैसे केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639407178020,"sku":"9789348497109","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789348497109.jpg?v=1789987365"},{"product_id":"9789348497284","title":"Us Se Muhabbat | उस से मुहब्बत By Varun Anand","description":"\u003cp\u003eउस से मुहब्बत' इस उन्वान से ही ज़ाहिर है कि वरुण आनंद की शायरी का ये मजमूआ, मुहब्बत की ग़ज़लों, नज़्मों और मसनवियों से सजा है । मुहब्बत की शायरी की इस किताब में महबूब से इजहार है, शिकायतें हैं और जुदाई के लम्हें दर्ज हैं। यहाँ मुहब्बत का हर रंग देखने को मिलेगा तो कहीं कहीं तंज़ का रंग इसे और दिलकश बनाता है । वरुण आनंद की शायरी आधुनिकता और परम्परा का अद्वितीय संगम है । एक ओर जहाँ आज की बातों को उनकी ग़ज़लों में जगह मिली है वहीं बड़ी बहर की पारम्परिक ग़ज़लें, नज़्में और मसनवियाँ इसे परम्परा का गाढ़ा रंग देती हैं ।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default 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Book","offer_id":54156800196900,"sku":"9789348497797","price":209.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789348497796.jpg?v=1789987552"},{"product_id":"9789348497673","title":"Paandaan | पानदान","description":"\u003cp\u003eपानदान’ — सिर्फ़ पान का सामान रखने की एक छोटी संदूक़ची नहीं, बल्कि एक ख़ानदानी विरासत है, जो पीढ़ियों से गुज़रते हुए मुमताज़ बेगम तक पहुँची है। यह अफ़साना एक औरत की उस नाज़ुक पर मज़बूत दुनिया की कहानी है, जो अपने हिस्से की इज़्ज़त, रुतबा और औलादों की परवरिश को उसी सलीके से सँभालती है, जैसे वह अपने पानदान को।\u003cbr\u003e\nमुमताज़ बेगम का जीवन उन तमाम औरतों का प्रतीक है, जो समय और हालात की मार झेलते हुए भी अपने भीतर की गरिमा और अपनापन नहीं खोतीं। मुज्तबा ख़ान ने इस दास्तान को उस दौर के पूरे सामाजिक परिवेश, उसकी भाषा और रवायतों समेत हमारे सामने ज्यों का त्यों रख दिया है।\u003cbr\u003e\nहर किरदार में मुहब्बत और इंसानियत की खुशबू है। भाषा में पुराने लखनऊ की नफ़ासत और क़िस्सागोई का ऐसा रंग है कि कहानी शुरू होते ही पाठक उस दुनिया में उतर जाता है — और आख़िरी पंक्ति तक वहीं ठहर जाना चाहता है।\u003c\/p\u003e\n\n\n\u003cp\u003eलेखक परिचय:\u003cbr\u003e\nमुज्तबा ख़ान प्रसिद्ध पटकथा लेखक और लोकप्रिय भाषा-शिक्षक हैं, जो अपनी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, इंसानी रिश्तों और सांस्कृतिक विरासत को बारीकी से पिरोते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639408259364,"sku":"9789348497673","price":139.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789348497673.jpg?v=1789987660"},{"product_id":"9789347125287","title":"Jaati Janaganana  | जाति जनगणना By Dr Laxman Yadav","description":"\u003cp\u003eजाति जनगणना का सवाल सिर्फ़ आँकड़ों का सवाल नहीं है। यह सत्ता, संसाधन, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय का सवाल है। यह किताब इसी सवाल को इतिहास की गहराई, राजनीति की जटिलता और समाज की संरचना के साथ जोड़कर देखती है। डॉ. लक्ष्मण यादव की यह पुस्तक जाति जनगणना को किसी ख़ास दौर तक सीमित नहीं करती, बल्कि उसे मानव सभ्यता की शुरुआती गिनतियों से लेकर आज़ाद भारत की राजनीतिक बहसों तक फैले लंबे सामाजिक-सांस्कृतिक प्रवाह में रखती है। किताब का बड़ा हिस्सा आधुनिक भारत में जाति जनगणना के इर्द-गिर्द खड़े आंदोलनों और विचारधाराओं पर केंद्रित है। फुले-शाहू-आंबेडकर, अय्यंकाली, नारायण गुरु, त्रिवेणी संघ, अर्जक संघ, समाजवादी आंदोलन, पिछड़ा वर्ग आयोगों, मंडल आयोग और मंडल आंदोलन से होते हुए कांशीराम के बहुजन विचार तक। यह किताब दिखाती है कि जाति जनगणना कैसे ‘जात से जमात बनाने’ का बुनियादी ज़रिया है। जाति जनगणना ने बहुजन गोलबंदी, राजनीतिक चेतना और सामाजिक परिवर्तन का औज़ार बनी। शैली के स्तर पर यह किताब आम पाठकों के लिए लिखी गई है, मगर इसके भीतर मौजूद सवाल पूरी तरह अकादमिक हैं। ये किताब उन तमाम सवालों का जवाब देती है, जिनको लेकर या तो भ्रम की स्थितियाँ हैं या अज्ञानता की। इस किताब सबसे बड़ी खासियत है— जटिल सामाजिक और ऐतिहासिक विमर्श को सरल, प्रवाहपूर्ण और संवादात्मक भाषा में प्रस्तुत करना। जाति जनगणना दरअसल जाति की राजनीति, सामाजिक न्याय के वैचारिक संघर्ष और भारतीय लोकतंत्र की अधूरी परियोजना पर एक गंभीर, मगर पठनीय हस्तक्षेप है।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639410290980,"sku":"9789347125287","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789347125287-_1.jpg?v=1787298235"},{"product_id":"9788119745203","title":"Rangbhoomi | रंगभूमि By Munshi Premchand","description":"\u003cp\u003eअंधे भिखारी सूरदास के पास एक ज़मीन है, जो पूरे गाँव के पशुओं की चारागाह है। जॉन सेवक उसपर सिगार का कारखाना लगाना चाहता है। अकेला सूरदास गाँव के लिए उस ज़मीन को बचाने की लड़ाई लड़ता है। इस लड़ाई में वह राजा, पूंजीपति, गाँव के षड्यंत्रकारियों और शहरी न्यायतंत्र से लड़ता हुआ शहीद होता है। यह संक्षिप्त कथा 'रंगभूमि' के जटिल और विस्तृत वितान का संकेत मात्र है। इसके साथ-साथ निर्मम अंग्रेजी सत्ता - व्यवस्था है और समाज में बदलाव की उठती गिरती लहरें है, और मनुष्यों के प्रतिक्षण बदलते हृदय। नैतिक और अनैतिक की बहसों के बीच प्रेमचंद की मँजी हुई लेखनी सब कुछ दर्ज करती चलती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639410618660,"sku":"9788119745203","price":314.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745203-_1.jpg?v=1787298238"},{"product_id":"9788119745890","title":"Premashram | प्रेमाश्रम By Munshi Premchand","description":"\u003cp\u003eकाशी के जमींदार परिवार के मुखिया प्रभाशंकर और भतीजे ज्ञानशंकर की जमींदारी में लखनपुर एक गाँव है। 'प्रेमाश्रम' उपन्यास में प्रेमचंद लखनपुर के लोगों की व्यथा कथा लिखते हैं कि कैसे अपने आसामी किसानों के उत्पीड़न से बेपरवाह जमींदार अपनी ही रासलीलाओं में मगन हैं। यह उत्पीड़न इतना बढ़ता है कि गाँव के सारे काम करने लायक पुरुष जेल चले जाते हैं ऊपर से बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक विपदाएँ अपनी जगह । जमीदार परिवार भी धीरे-धीर बदलता है, विलास की सीमाएँ सामने आती जाती हैं और मजलूम किसानों के भी दिन फिरते हैं, यही कथा है 'प्रेमाश्रम' की।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639410651428,"sku":"9788119745890","price":314.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745890-_1.jpg?v=1787298240"},{"product_id":"9788119745654","title":"Seva Sadan | सेवा सदन By Munshi Premchand","description":"\u003cp\u003eकहने को बहुत सारे पात्र हैं, उनके बदलने की परिस्थितियाँ हैं, उनका जटिल जीवन-चक्र भी है। लेकिन प्रेमचंद का उपन्यास 'सेवासदन' सुमन की कहानी है। एक ईमानदार दारोगा कृष्णचंद्र की प्यारी बेटी सुमन, पिता के पहले रिश्वत लेने की दुर्घटना से उलझकर वेश्यावृत्ति के रास्ते पर पहुँच जाती है। लेकिन कथा यहीं समाप्त नहीं हो जाती। सुमन अपनी आंतरिक ज्योति को वापस पाती है, अपने से जुड़े लोगों के जीवनोद्धार का प्रमुख कारण बनती है। कथा का अंत आते-आते बेसहारा को सहारा देने के निमित्त बने केंद्र 'सेवासदन' की निर्देशिका बनती है ।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default 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के भीतर भी उतरता है ।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52639411077412,"sku":"9788119745685","price":192.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788119745685.jpg?v=1789988001"},{"product_id":"barish-ke-pinjare-mein-बारिश-के-पिंजड़े-में","title":"Barish Ke Pinjare Mein | बारिश के पिंजड़े में","description":"\u003cp\u003e'जीते जी मैं हो गया हूँ\/अपना ही पूर्वज'- यह और ऐसी ही अनेक मार्मिक पंक्तियों से भरा हुआ यह संग्रह एक कवि की पहली कृति है। परन्तु इस लेखन में भी एक विलक्षण प्रौढ़ता है, जो पाठकों का ध्यान ज़रूर आकृष्ट करेगी। सबसे ध्यान देने योग्य बात यह है कि समकालीन कविता के सुपरिचित मुहावरे को अपने ढंग से बरतता हुआ यह कवि उसके भीतर से अपने लिए नयी सरणियाँ निकालना चाहता है। यह रचनात्मक कोशिश इस संग्रह को ख़ासतौर से उल्लेखनीय बनाती है। कथन की नयी भंगिमाओं के साथ-साथ यहाँ विषय चयन में भी एक सुखद विविधता देखी जा सकती है, जिसका विस्तार 'पानी गिरने की आवाज़' से कालाहांडी के उस अकाल तक फैला हुआ है, जिसके बचे हुए जल में भी सूखे का प्रतिबिम्ब है। यह कविता का सिर्फ़ भौगोलिक विस्तार नहीं है, बल्कि एक विकासमान कवि के आंतरिक भूगोल का भी सूचक है।\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e'बारिश के पिंजड़े में' चंदनसिंह की, समकालीन कविता के दरवाज़े पर दी जानेवाली यह पहली दस्तक दूर तक सुनी जायेगी-क्योंकि यहाँ एक भरोसा है और उस भरोसे में हमारे समय की छिपी हुई 'आयरनी' भी- क्षमा करें\u003cbr\u003eकिसी के हृदय-रोग के बारे में सुनकर\u003cbr\u003eदुःख मुझे अधिक नहीं होता\u003cbr\u003eपृथ्वी पर हृदय के बचे रहने का भरोसा होता है।\u003cbr\u003e-केदारनाथ सिंह\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":55988763394340,"sku":"9788169235099","price":139.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788169235099-_1.jpg?v=1790163870"},{"product_id":"amavas-mein-jugnoo-अमावस-में-जुगनू","title":"Amavas Mein Jugnoo | अमावस में जुगनू","description":"\u003cp\u003e\u003cspan\u003eगणित के प्रोफ़ेसर रहे कुमार विनोद की यह पृष्ठभूमि उनकी ग़ज़लों में भी झलकती है। एक गणितज्ञ जब शायरी करेगा तो यक़ीनन सब कुछ नपा-तुला होगा। कुमार विनोद की इन ग़ज़लों में शब्दों का चुनाव, क़ाफ़िये और रदीफ़ एकदम सधे और नपे-तुले हुए हैं। इस संग्रह की ग़ज़लों में इस्तेमाल हुए क़ाफ़िये अगर लाजवाब करते हैं, तो तनिक हटकर के लिए गये रदीफ़ अचंभित । मौलिक बिंबों वाली इन ग़ज़लों का टटकापन हैरत में डाल देता है । कुमार विनोद सिर्फ़ मिज़ाज ही नहीं, ग़ज़लों का शऊर भी बख़ूबी पहचानते हैं। एक निहायत नये मुहावरे और अंदाज़ के साथ वे इस संग्रह की ग़ज़लों में जहाँ एक ओर जीवन के विराट फ़लक की पृष्ठभूमि में उत्सवधर्मिता के विविध रंगों को रूपायित करते हैं, तो वहीं दूसरी ओर इन ग़ज़लों में सामाजिक सरोकार भी बड़े सलीक़े के साथ अभिव्यक्त हुए हैं । इन ग़ज़लों में अनेक अश' आर ऐसे हैं जो हमारे मेमरी कार्ड पर दर्ज हो जाते हैं। कई बार अंदाज़ सवाल-जवाब का होता है। कुमार विनोद अपने पाठकों को किसी ऊँचे डायस पर चढ़कर संबोधित नहीं करते बल्कि अगल-बगल बैठकर कुछ कहते और कुछ सुनते-से लगते हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":56008011219236,"sku":"9788169235303","price":174.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788169235303-_1.jpg?v=1790163873"},{"product_id":"atirikt-shunya-अतिरिक्त-शून्य-by-amit-upmanyu","title":"Atirikt Shunya | अतिरिक्त शून्य By Amit Upmanyu","description":"\u003cp\u003eहमारे समय की निर्मम और नंगी सच्चाइयों को व्यक्त करने के लिये अमित उपमन्यु की कविता अलग-अलग कई रास्तों की तलाश करती है। उसके लिये जीवन को जानना एक अंतहीन और सतत\u003cbr\u003eप्रक्रिया है। उसके लिये यह दौर समय के माथे का एक ऐसा फोड़ा है, जिससे लगातार मवाद रिस रही है। वर्तमान एक नरक है, जिसमें रोम-रोम दु:ख रहा है। अमित की कविता मुखर वाग्मिता से परहेज नहीं करती लेकिन इसके साथ ही वह पौराणिक आख्यानों के संदर्भों और स्मृतियों के पास जाकर अपने समय का एक नया पाठ भी तैयार करती है। यह ऐसा पाठ है, जिसमें मिथकों और आज की वास्तविकताओं से एक नये अर्थ की सृष्टि होती है।\u003cbr\u003eअमित उपमन्यु की कविता में बाहर और भीतर के बीच एक निरन्तर\u003cbr\u003eचलती आवाजाही है। एक रिश्ता है, मन के भीतर और बाहर का। एक ब्रह्माण्ड है, जिसमें जो पृथ्वी है उसमें एक घर है, जिसमें वह रहता है लेकिन इस मन के भीतर एक और मन है, जिसमें वह अपना घर बना रहा है। इस घर के भीतर एक ब्रह्माण्ड है और इस ब्रह्माण्ड में एक और पृथ्वी है, जिस पृथ्वी पर वह बेघर भटक रहा है। अमित की इन कविताओं में बाहर और भीतर के बीच द्वन्द्व भी है और निरन्तर आवाजाही भी ।\u003cbr\u003eराजेश जोशी\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":56055880319268,"sku":"9788169235167","price":139.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788169235167.jpg?v=1790163876"},{"product_id":"pari-kathayein-ki-adbhut-kathayein-पूरी-लोक-की-अद्भुत-कथाएँ","title":"Pari Kathayein Ki Adbhut Kathayein | पूरी लोक की अद्भुत कथाएँ","description":"\u003cp\u003eइस पुस्तक की कहानियाँ आपको एक ऐसे संसार में ले जाएंगी, जहाँ पंखों वाली परियों की चमक, बोलती जादुई छड़ियाँ, रहस्यमयी जंगल और अद्भुत चमत्कारों का वास है।\u003cbr\u003eयहाँ आप बहादुर राजकुमारों, दयालु राजकुमारियों और जादुई जीवों के उन कारनामों को पढ़ेंगे, जिन्होंने पीढ़ियों से पाठकों को कल्पना के सागर में\u003cbr\u003eगोता लगाने के लिए प्रेरित किया है।\u003cbr\u003eअपनी कल्पना के पंख फैलाएं और\u003cbr\u003eपरियों के इस मंत्रमुग्ध कर देने वाले सफर में खो जाएं !\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":56290383888676,"sku":"9788169235297","price":209.3,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788169235297.jpg?v=1790163918"},{"product_id":"singhasan-battisi","title":"Singhasan Battisi | सिंहासन बत्तीसी","description":"\u003cp\u003eसिंहासन बत्तीसी' भारतीय लोक-कथाओं का एक ऐसा अनमोल रत्न है, जो सदियों से नीति, वीरता और न्याय के आदर्श प्रस्तुत करता आ रहा है। यह कथा संग्रह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि एक महान राजा के गुणों की कसौटी है । 'सिंहासन बत्तीसी' का सीधा संबंध महाराजा विक्रमादित्य से है, जो अपनी न्यायप्रियता, साहस और दानशीलता के लिए भारतीय इतिहास में अमर हैं ।\u003cbr\u003eसिंहासन बत्तीसी हमें यह संदेश देती है कि पद या सिंहासन केवल शक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह महान चरित्र और उत्तरदायित्व की माँग करता है ।\u003cbr\u003eराजा भोज के माध्यम से पुतलियाँ संसार को यह सिखाती हैं कि शासन करने का अधिकार उसी को है, जिसका हृदय विक्रमादित्य की भांति निर्मल और परोपकारी हो ।\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":56290384937252,"sku":"9789347125041","price":192.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9789347125041.jpg?v=1790163919"},{"product_id":"mirza-ghalib-ke-100-rang-मिर्ज़ा-ग़ालिब-के-100-रंग","title":"Mirza Ghalib Ke 100 Rang | मिर्ज़ा ग़ालिब के 100 रंग","description":"\u003cp\u003eग़ालिब पर बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन ग़ालिब के सौ शेरों के साथ बैठकर उनके भीतर खुलते अर्थों की सौ अलग दिशाओं को देखना एक अलग तरह का काम है। मिर्ज़ा ग़ालिब के सौ रंग इसी पाठकीय और आलोचनात्मक अनुभव से बनी पुस्तक है। इसमें ग़ालिब के सौ चुनिंदा शेर हैं-ऐसे शेर, जिन्हें हममें से अधिकांश पहले से जानते हैं, सुनते आए हैं, उद्धृत करते रहे हैं; लेकिन जिन्हें ध्यान से पढ़ने पर भाषा, अनुभव और अर्थ की नई परतें खुलती हैं। ग़ालिब की महानता केवल उनकी जटिलता में नहीं, बल्कि इस क्षमता में है कि उनका सबसे सहज शेर भी पाठक को अपने भीतर कहीं गहरे ले जा सकता है।\u003cbr\u003eप्रेम, अकेलापन, मृत्यु, ईश्वर, आत्मसम्मान, इच्छा, असफलता और जीवन की विडंबनाएँ - इन सबके बीच ग़ालिब का काव्य-मन लगातार अपने आप से संवाद करता है। यही कारण है कि उनका शेर अपने समय से निकलकर हर नए समय में फिर से अर्थवान होता है। यह पुस्तक ग़ालिब के शेरों के अंतिम अर्थ सुनाने की कोशिश नहीं करती। वह उनके साथ कुछ देर ठहरती है-शब्दों को देखती है, वाक्य की बनावट को सुनती है, चुप्पियों को पढ़ती है और पूछती है कि एक शेर आख़िर हमारे भीतर इतना दूर तक क्यों चला जाता है। ग़ालिब को जानना शायद उनके शेर याद कर लेना 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की श्रद्धाभाव से लिखी गई कोई पारंपरिक जीवनी नहीं है। भगत सिंह के प्रति इसकी जिम्मेदारियाँ इससे कहीं ज़्यादा गहरी हैं। यह उनके आस-पास बिखरी कहानियों, खबरों, तथ्यों और इतिहास के रूप में स्थापित छवियों को पुनर्विचार के लिए नए सिरे से दरियाफ़्त करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइसके बीच से भगत सिंह का जो किरदार उभरता है, उसमें वे नायक तो बनते हैं, लेकिन गांधी खलनायक के रूप में नहीं दिखते। यह पुस्तक स्वाधीनता आंदोलन को 'बाइनरीज़' के स्थापित ढाँचे से बाहर निकालकर एक मुकम्मल शक्ल में देखना चाहती है—ताकि हमारे भारतीय गणराज्य को संपूर्णता में समझा जा सके। इसका उद्देश्य इतिहास को इतिहास सुनाना नहीं है, बल्कि वर्तमान को इतिहास बताना है, जिससे भविष्य के रास्ते तय होते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअशोक कुमार पाण्डेय कश्मीर और स्वाधीनता आंदोलन के एक चर्चित इतिहासकार के रूप में जाने जाते हैं। वे विवादों से बचने वाले नहीं, बल्कि उन्हें और साफ़ करके उनके अंतर्विरोधों को सामने रखने वाले लेखक हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउनकी यह किताब आपके मन में भगत सिंह के बारे में घुमड़ रहे अनेक प्रश्नों को और स्पष्ट ढंग से पूछना सिखाएगी और संभवतः आपके कई सवालों के संतोषजनक जवाब भी देगी।\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003cdiv id=\"bylineInfo_feature_div\" class=\"celwidget\" data-feature-name=\"bylineInfo\" data-csa-c-type=\"widget\" data-csa-c-content-id=\"bylineInfo\" data-csa-c-slot-id=\"bylineInfo_feature_div\" data-csa-c-asin=\"8169235774\" data-csa-c-is-in-initial-active-row=\"false\" data-csa-c-id=\"9g64v8-skteb8-nqy5op-f7toj1\" data-cel-widget=\"bylineInfo_feature_div\"\u003e\u003c\/div\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":67576462147876,"sku":"9788169235778","price":245.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/BhagatsinghBook_FrontSide_1.png?v=1791316509"},{"product_id":"un-pedon-ki-yaad-उन-पेड़ों-की-याद","title":"Un Pedon Ki Yaad | उन पेड़ों की याद","description":"\u003cp dir=\"auto\" data-start=\"0\" data-end=\"460\" class=\"PDq2pG_selectionAnchorContainer\"\u003eयात्राओं और मनुष्यों के संस्मरण सबने पढ़े हैं। विनीता परमार ने इस अनूठी किताब में वृक्षों, फलों, फूलों और अन्य वनस्पतियों से सम्बन्धित संस्मरण लिखे हैं। इनमें उपेक्षित और अलक्षित रह जाने वाले पौधे भी हैं और महाकाय वृक्ष भी। इन संस्मरणों में बचपन की जीभ पर ऐसे फलों का ताज़ा आस्वाद मिलेगा जो बाज़ार में नहीं मिलते। यहाँ देर रात खिलने वाले पारिजात की ख़ुशबू है और गुड़हल का दहकता लाल रंग। इन्हें पढ़ते हुए आप अपने बचपन में कब पहुँच जाएँगे आपको पता भी नहीं चलेगा।\u003cspan class=\"PDq2pG_selectionAnchor\"\u003e\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp dir=\"auto\" data-start=\"462\" data-end=\"550\" data-is-last-node=\"\" data-is-only-node=\"\"\u003eवनस्पति जगत को कृतज्ञता और सहृदयता से याद करता अनुपम गद्य, जिसमें रवानी भी है, ज्ञान भी।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default 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निकली,\u003cbr\u003eपर गोबर के दलदल में फँस गई। तभी एक भूखा सियार वहाँ आ धमका।\u003cbr\u003eक्या फिरकी अपनी जान बचा पाएगी? आइए देखते हैं।\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"The Kid Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":67627331879204,"sku":"9788169235563","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788169235563_1_bd5a7ea3-7216-49c9-87fb-32a43114ee01.jpg?v=1791808114"},{"product_id":"bhartiya-lok-kathayein-भारतीय-लोक-कथाएँ","title":"Bhartiya Lok Kathayein | भारतीय लोक कथाएँ","description":"\u003cp\u003eये कहानियाँ पीढ़ियों से दादी-नानी के मुख से सुनाई जाती रही हैं।\u003cbr\u003e‘भारतीय लोक कथाएँ' पुस्तक इन्हीं प्राचीन और जादुई कहानियों का एक संग्रह है, जो आपको भारत के विभिन्न अंचलों की संस्कृति और संस्कारों की जीवंत यात्रा पर ले जाएगी। अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए यह किताब आपके लिए एक रास्ता बन सकती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Unbound Script","offers":[{"title":"Default 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