ड़कती धूप-सा पिता । नर्म छाँव-सी माँ। एक सकुचाया-सा लड़का । एक धक-सी गोरी लड़की । और एक अजीब-सी प्रेम कहानी । एक ऐसी कहानी जिसमें प्रेम तो तरतीब से सिमटा हुआ है, लेकिन कहानी बेतरतीब-सी जाने कहाँ से कहाँ तक फैली हुई है !
# पटना साइंस कॉलेज के केमिस्ट्री लैब से लेकर देहरादून इंडियन मिलिट्री एकेडमी के चेटवुड परेड-ग्राउंड तक ।
# बिहार के विधान-सभा चुनाव से लेकर भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक तक ।
# शाहरुख़ ख़ान की ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ से लेकर सलमान ख़ान की ‘सुल्तान’ तक। कहानी, जो अपनी तरतीब सी बेतरतीबी में ‘हमने कलेजा रख दिया- चाकू-की-नोक-पर’ से उठती है तो फिर ‘ऐसी-नज़र-से-देखा-उस- ज़ालिम ने चौक पर ही जाकर गिरती है।
गौतम राजऋषि ने अपने लेखन की शुरुआत कविता से की थी। धीरे-धीरे, छंदों को समझ लेने के बाद, ग़ज़लों में अपनी दिलचस्पी लेने लगे और अपने अनूठे ‘स्टाइल’ के दम पर गौतम ने ग़ज़लों और शायरी की दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है!
गौतम एक दशक से भी ज्यादा समय से लेखन कार्यों में लगे हैं और भारतीय सेना में एक सक्रिय अफसर, कर्नल की भूमिका भी निभा रहे हैं। उनकी रचनाएँ हंस, वागर्थ, आजकल, कादंबिनी, कथादेश, अहा ज़िंदगी, कथाक्रम, बया, काव्या, लफ़्ज़, शेष, वर्तमान साहित्य, कृति ओर, समावर्तन, अलाव आदि मुल्क की तमाम साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। ग़ज़लों के अतिरिक्त गौतम कहानी-लेखन में भी रूचि लेते हैं और उनकी एक पुस्तक, हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज, बेस्टसेलर हो चुकी है एवं गौतम की लेखन-शक्ति को आलोचकों ने भी, पाठकों के साथ-साथ, सराहा है!
गौतम की तीन कहानियों का मराठी, गुजराती और उर्दू में अनुवाद भी हो चूका है और हाल में ही हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज का ओड़िया में अनुवाद हुआ है। इसके अलावे, कथा-संग्रह का अंग्रेजी, मराठी, बोंगाला अनुवाद भी शीघ्र ही आने वाला है।
कथादेश में लगातार तीन साल से छप रहा इनका मासिक स्तंम्भ “फ़ौजी की डायरी” पाठकों द्वारा ख़ूब पसंद किया जा रहा। फिलहाल राजपाल प्रकाशन से आयी अपने दूसरे ग़ज़ल-संग्रह “नीला नीला” की लोकप्रियता पर इतरा रहे हैं।
Additional information
Weight
0.1 kg
Dimensions
19 × 12 × 1 cm
Author
Gautam Rajrishi
Imprint
Yuvaan Books
Publication date
22 October 2024
Pages
160
Reading age
Upto 18 Years
ISBN-13
978-8197664526
Binding
Paperback
Language
Hindi
Brand
Yuvaan Books
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