अय्यारों से लेकर यारों तक और जहाज़ियों से लेकर सिपहसालारों तक, प्यार और जंग में इंसानों का दम भर साथ दिया है कबूतरों ने। भला हो उन इतिहास की किताबों का जो न लिखी गईं और न कबूतरों ने पढ़ीं, वरना कबूतरों के जत्थे अपने पुरखों की सेवा का हिसाब लेने हमारे बारजों पर यूं भी चले ही आते। क्या मालूम आपकी बालकनी का कबूतर ऐसा ही कुछ पूछने की कोशिश में हो। फिर भी कबूतर हैरान तो होते होंगे कि शहर क़स्बों की दीवारों पर हकीम लुकमानी जैसों के ठीक बाद ‘कबूतर जाली लगवायें’ के इश्तिहार आख़िर क्यों कर लग गए हैं? हमारे हिस्से हैरानी का ये सिरा आया कि सदियों पुरानी और दुनिया भर में आज भी खेली जा रही कबूतरबाज़ी की ज़मीन पर हमने अब तक कहानियाँ क्यों नहीं रोपीं? नतीजा, पुलिस बैंड में ट्रम्पेट बजाने वाले हेड कांस्टेबल एकईस राम और उनके कबूतरबाज़ बेटे कबीर के गिर्द घटती कहानी हम आपकी नज़र कर रहे हैं। पुराने किले और गंगा के दोआब पर कबूतरों वाले आसमान के नीचे उपजा ये उपन्यास कबूतरों या कबूतरबाज़ों भर की कहानी नहीं है, ये हमारी आपकी कहानी है। कबूतरों ने तो सिर्फ़ आईना दिखाया है, क्योंकि यही तो वे करते आए हैं सैकड़ों बरसों से…. और कबूतरबाज़ भी …
विजय सुत्तान की पैदाइश नागौर राजस्थान की है पढ़ाई-लिखाई दिल्ली यूनिवर्सिटी और भारतीय जन संचार संस्थान से हुई है। एक से ज्यादा के पत्रकारिता के करिका में इंडिया न्यूज द लालनटॉप इंडिया टुडे मैगजीन में काम कर चुके हैं। फिलहाल दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम में बतौर सीनियर स्पेशल करिडिट जुड़े हुए हैं। दिन की तबियत खाँटी रिपोर्टर की रही है। अपने आस-पास घट रही घटनाओं में कहानी खोजने की पेशेवर लत का शिकार रहे है। ओरल हिस्ट्री नियको और लोक संगीत के प्रति कॉलिज के दौर से ही भयंकर आकर्षण रहा है। बचपन में पेंसिल के छिलके और टॉफी केौपा संभालकर रखने वाले विनय बतौर रिपोर्टर उन किरदारों को भी दिमाग के एक कोने में सहेजते रहे जिन्हें बारह सौ शब्दों की न्यूज रिपोर्ट में खपाया नहीं जा सका। कबूतरबाज के किरदार बरसों से जमा किए गए इन्हीं क्षेपकों के नायक है।
सुमित सिंह
पेशे से पत्रकार सुमित सिंह की पैदाइश जिला गाजीपुर उतर प्रदेश की है। मास कम्युनिकेशन में एम. फिल की डिग्री लेने के बाद सुमित ने साल 2012 में टूटर्णन भोपाल से पत्रकारिता की शुरुआत की। गुजो एक दशक में दूरदर्शन दिल्ली आकाशवाणी लल्लनटॉप, बेटर इंडिया और योरस्टोरी के साथ काम कर चुके हैं। वर्तमान में इंडिया टुडे मैगजीन के लिए काम करते हैं। ‘पदंत घुर्मत लिखंत के दर्शन में धनपर विश्वास रहने वाले सुमित ने नौकरी और यायावरी दोनों को एक- एक आँख से साधने की विधा पर जतन से काम किया है। हिमालय और गंगा को धुरी में रखकर बुने गए बजरिपन का एक हासिल उनका ये पहला उपन्यास ‘कबूतरबाज’ भी है। किरदारों की तहदार कहानी और कहन के दोआब में तीसरी नदी खोजने का शाप इलाहाबाद के संगम से मोल लेकर दिल्ली पहुंचे। बहरहाल, पत्रकारिता और सिनेमा लेखन के बीच दह बैठक में व्यस्त है।
Additional information
Weight
0.200 kg
Dimensions
7.7 × 5.1 × 1 cm
Author
Vinay Sultan & Sumit Singh
Imprint
Yuvaan Books
Publication date
23 January 2025
Pages
259
Reading age
14 years and up
ISBN-13
978-9348497710
Binding
Paperback
Language
Hindi
Brand
Yuvaan Books
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