{"product_id":"atirikt-shunya-barish-ke-pinjare-mein-kaun-jaat-ho-bhai","title":"Atirikt Shunya + Barish Ke Pinjare Mein + Kaun Jaat Ho Bhai","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAtirikt Shunya\u003c\/strong\u003e - \u003cspan\u003eहमारे समय की निर्मम और नंगी सच्चाइयों को व्यक्त करने के लिये अमित उपमन्यु की कविता अलग-अलग कई रास्तों की तलाश करती है। उसके लिये जीवन को जानना एक अंतहीन और सतत\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eप्रक्रिया है। उसके लिये यह दौर समय के माथे का एक ऐसा फोड़ा है, जिससे लगातार मवाद रिस रही है। वर्तमान एक नरक है, जिसमें रोम-रोम दु:ख रहा है। अमित की कविता मुखर वाग्मिता से परहेज नहीं करती लेकिन इसके साथ ही वह पौराणिक आख्यानों के संदर्भों और स्मृतियों के पास जाकर अपने समय का एक नया पाठ भी तैयार करती है। यह ऐसा पाठ है, जिसमें मिथकों और आज की वास्तविकताओं से एक नये अर्थ की सृष्टि होती है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eBarish Ke Pinjare Mein\u003c\/strong\u003e - \u003cspan\u003e'जीते जी मैं हो गया हूँ\/अपना ही पूर्वज'- यह और ऐसी ही अनेक मार्मिक पंक्तियों से भरा हुआ यह संग्रह एक कवि की पहली कृति है। परन्तु इस लेखन में भी एक विलक्षण प्रौढ़ता है, जो पाठकों का ध्यान ज़रूर आकृष्ट करेगी। सबसे ध्यान देने योग्य बात यह है कि समकालीन कविता के सुपरिचित मुहावरे को अपने ढंग से बरतता हुआ यह कवि उसके भीतर से अपने लिए नयी सरणियाँ निकालना चाहता है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eKaun Jaat Ho Bhai\u003c\/strong\u003e - \u003cspan\u003eइन सभी कविताओं में आए समकालीन सामाजिक-राजनैतिक-आर्थिक- सांस्कृतिक विमर्श, बहस, संघर्ष और दलित-बहुजन चेतना को आसानी से देखा जा सकता है । बच्चा लाल ‘उन्मेष’ के संग्रह में शामिल तमाम कविताएँ समाज में फैली असमानता, उत्पीड़न, शोषण, दमन को वर्गीय और जातीय दोनों आधार पर चिह्नित करती हैं और उन पर कड़ा प्रहार करती हैं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Combo_Set","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":67587374874916,"sku":null,"price":452.9,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/Untitleddesign_2.png?v=1790853875","url":"https:\/\/unboundscript.com\/products\/atirikt-shunya-barish-ke-pinjare-mein-kaun-jaat-ho-bhai","provider":"Unbound Script","version":"1.0","type":"link"}