{"product_id":"family-reading-pack-us-se-muhabbat-aadat-hai-humko-ghar-ke-vaaste-neend-ka-baksa-phool-padh-rahe-hai-do-you-like-this-personality","title":"Family Reading Pack | Us Se Muhabbat + Aadat Hai Humko + Ghar Ke Vaaste + Neend Ka Baksa + Phool Padh Rahe Hai                               Do you like this personality?","description":"\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cdiv\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eUs Se Muhabbat - \u003c\/strong\u003eउस से मुहब्बत' इस उन्वान से ही ज़ाहिर है कि वरुण आनंद की शायरी का ये मजमूआ, मुहब्बत की ग़ज़लों, नज़्मों और मसनवियों से सजा है । मुहब्बत की शायरी की इस किताब में महबूब से इजहार है, शिकायतें हैं और जुदाई के लम्हें दर्ज हैं। यहाँ मुहब्बत का हर रंग देखने को मिलेगा तो कहीं कहीं तंज़ का रंग इसे और दिलकश बनाता है । वरुण आनंद की शायरी आधुनिकता और परम्परा का अद्वितीय संगम है । एक ओर जहाँ आज की बातों को उनकी ग़ज़लों में जगह मिली है वहीं बड़ी बहर की पारम्परिक ग़ज़लें, नज़्में और मसनवियाँ इसे परम्परा का गाढ़ा रंग देती हैं ।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAadat Hai Humko - \u003c\/strong\u003eगोपाल दत्त प्रसिद्ध अभिनेता और गीतकार गोपाल दत्त का यह कविता संग्रह उनके रचनात्मक संसार का एक नया और अनदेखा पक्ष सामने लाता है। मंच और परदे पर दिखाई देने वाले उनके व्यक्तित्व से परे, यह किताब उन भावनाओं, विचारों और अनुभवों को सहेजती है, जो अक्सर अभिनय की रोशनी में छूट जाते हैं। इस संग्रह में शामिल है उनकी लोकप्रिय और चर्चित कविता ‘और करो थिएटर’, साथ ही बड़े शहर के शोऑफ और कला की इंसाफ़ पसंदगी को दर्ज करती उनकी थोड़ी ड्रामैटिक लेकिन बेहद चर्चित कविता ‘बड़े शहर का स्क्रीनप्ले’। इसके अलावा, इसमें उनके कई ऐसे गीत भी हैं, जिन्हें आप पहले सुन चुके होंगे या जिनकी गूँज आपको जानी-पहचानी लगेगी। आदत है हमको गोपाल दत्त के बहुरंगी रचनात्मक व्यक्तित्व की सच्ची झलक है—जहाँ कविता, गीत और जीवन एक-दूसरे में घुलते नज़र आते हैं। कविता प्रेमियों और रंगमंच से जुड़े पाठकों के लिए यह संग्रह विशेष रूप से पठनीय है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eGhar Ke Vaaste - \u003c\/strong\u003eयह लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का पहला काव्य संग्रह है। इसके हर गीत और नज़्में पहले ही लोगों की ज़ुबान पर हैं। स्वयं श्रीवास्तव अपने समय की असल समस्याओं को उठाते हैं। उनकी कविताओं में युवा मन की बेकरारी, बेकारी, प्रेम, असफलताबोध और सौन्दर्याकांक्षा मिलेगी। जब उनकी हिन्दुस्तानी जुबान में आप इन्हीं चीज़ों को सुनते हैं तो एक ही बात जेहन में कौंधती है— “देखना तक़रीर की लज़्ज़त कि जो उसने कहा मैं ने ये जाना कि गोया ये भी मेरे दिल में है”।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eNeend Ka Baksa - \u003c\/strong\u003eआकाश में तारे टिमटिमा रहे हैं तो नीचे घास पर जुगनू । अक्षर किताबों से निकल भागे, नदी पार की लेकिन पहुँचे भी तो कहाँ - काँटों के गाँव । समंदर, नदी, नहर और बाल्टी सबमें पानी है। अपनी अपनी जगहों से पानी और पानी की बातें हो रही हैं। उधर फूलों के रंग तुमसे कुछ कहने को हैं । सपने में लाहौर जाकर कुल्फी खा लो और सपने में ही घर लौट आओ। ऐसी प्यारी और जादूभरी कविताएँ पढ़नी हैं ? 'नींद का बक्सा' घर ले जाओ और चुपके से खोलकर देखो। इसमें जितनी सुन्दर कविताएँ हैं उतने ही सुन्दर चित्र। गौर से देखो तो इस बक्से के चित्र और कविताएँ बातें करती दिखेंगी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePhool Padh Rahe Hai - \u003c\/strong\u003eयहाँ फूल किताबें पढ़ रहे हैं।\u003cbr\u003eउनपर बैठी तितलियाँ खुली हुई किताबें हैं।\u003cbr\u003eऔर भौरों की गुंजार उनके द्वारा याद किया जा रहा सबक ।\u003cbr\u003eकद्दू दबे पाँव छप्पर पर चढ़ रहे हैं\u003cbr\u003eऔर फिर अपने भारी फलों के साथ छप्परों को तोड़ डालते हैं ।\u003cbr\u003eबच्चे अक्षरों और शब्दों के बीज बोते हैं,\u003cbr\u003eजो भाषा का पेड़ बन जाता है।\u003cbr\u003eबच्चे इसके वाक्यों की टहनी पर कविताओं के घोंसले बनाते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"Combo_Set","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":67898560446756,"sku":"Family_Pack_3","price":598.2,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/4_79fa123f-8789-4819-8c7d-b96ef96b3152.png?v=1792738721","url":"https:\/\/unboundscript.com\/products\/family-reading-pack-us-se-muhabbat-aadat-hai-humko-ghar-ke-vaaste-neend-ka-baksa-phool-padh-rahe-hai-do-you-like-this-personality","provider":"Unbound Script","version":"1.0","type":"link"}