{"product_id":"karmyog-कर्मयोग","title":"Karmyog | कर्मयोग","description":"\u003cp\u003eवेदान्त का सबसे उदात्त तत्त्व यह है कि हम एक ही लक्ष्य पर भिन्न-भिन्न मार्गों से पहुँच सकते हैं। स्वामी जी ने इन्हें साधारण रूप से चार मार्गों में विभाजित किया है- कर्ममार्ग, भक्तिमार्ग, योगमार्ग और ज्ञानमार्ग । परन्तु वे इन्हें बिल्कुल पृथक्-पृथक् विभाग नहीं मानते। वे कहते हैं कि ऐसी बात नहीं कि तुम्हें कोई ऐसा व्यक्ति मिले, जिसमें कर्म करने के अतिरिक्त दूसरी कोई शक्ति न हो, अथवा जिसमें केवल भक्ति या केवल ज्ञान के अतिरिक्त और कुछ न हो। ये विभाग उन्होंने केवल मनुष्य की प्रधान प्रवृत्ति अथवा गुण प्राधान्य के अनुसार किये हैं। ये सब मार्ग एक ही लक्ष्य में जाकर एक हो जाते हैं।\u003cbr\u003eइसमें एक रास्ता है-कर्मयोग । स्वामीजी का यह ग्रंथ 'कर्मयोग' मानव जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण और व्यावहारिक विषय पर आधारित है-काम करने का सही ढंग और उसका आंतरिक दर्शन । यह पुस्तक हमें सिखाती है कि कैसे हम अपने दैनिक कर्त्तव्यों का पालन करते हुए भी मानसिक शांति, स्वतंत्रता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Yuvaan Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":56221416587556,"sku":"9788169235341","price":159.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0997\/1679\/2612\/files\/9788169235341.jpg?v=1788782704","url":"https:\/\/unboundscript.com\/products\/karmyog-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97","provider":"Unbound Script","version":"1.0","type":"link"}