मोहब्बत की दुकान जीने का सामान
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यशवंत व्यास बहुत वरिष्ठ व्यंगकार हैं। बात कहने की उनकी अपनी शैली है और उस शैली में वह सबसे अलग दिखते हैं। उनकी पुस्तक मोहब्बत की दुकान मेरे पास आई... Read more...
होलिका- पितृसत्ता का उन्मादी नृत्य – नीलिमा चौहान
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होली, होलिका और पितृसत्ता पर विचार ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’ जैसी विचारोत्तेजक और बहुचर्चित किताब की लेखिका नीलिमा चौहान ने होली की ‘परंपरा’ को स्त्री दृष्टि से देखा है। इस... Read more...
क़िस्सें लोकल के: मुंबई की पटरियों पर दौड़ती अनगिनत कहानियाँ
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मुंबई में पाँच मिनट बहुत मायने रखते हैं। पाँच मिनट में ट्रेन छूट सकती है, किसी इंटरव्यू का समय निकल सकता है, किसी अपने से मुलाकात हो सकती है, या... Read more...
कंबोडिया कंपाउंड: साइबर अपराध की दुनिया का रोमांचक और भयावह चेहरा
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आज जब हमारा अधिकांश जीवन मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और इंटरनेट के इर्द-गिर्द घूमता है, तब साइबर अपराध केवल अखबारों की खबर नहीं रह गया है। यह हमारे रोजमर्रा के... Read more...