Manish

Manish

पाँच मार्च उन्नीस सौ छियानवे को जन्मे मनीष खुद को 'नासदी से उपजा आर्टिस्ट' कहते हैं। जन्मभूमि दिल्ली रही और कर्मभूमि बदलती रही। पढ़ाई की बात की जाये तो दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी विषय में बी.ए. और एम.ए. किया। दिल्ली ने कुछ दिनों के लिए खुद से दूर किया तो 'सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ जम्मू' ने पनाह दी। ख़ुद को साहित्य का क़र्ज़दार मानते हैं इसलिए हिंदी साहित्य में 'विकलांग विमर्श' को स्थापित करना चाहते हैं। 'केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू' से विकलांग विमर्श पर पीएचडी जारी है।अध्ययन और अध्यापन विरासत में मिले हैं, तो उसको संभाल भी रहे हैं और जी भी रहे हैं। फिलहाल दिल्ली के एक विद्यालय में कहानियाँ और कविताएँ पढ़ाते हैं।आजकल अपने परिचय में एक लाइन और जोड़ने लगे हैं - 'एक खूबसूरत-सी मोहतरमा का शौहर'