Rekha Suthar

Rekha Suthar

रेखा सुथार

राजस्थान के पाली जिले के एक छोटे से गाँव ‘घाणेराव’ की धूल भरी
पगडंडियों से निकलकर मुंबई की ऊँची इमारतों और फिर खुद के स्टार्टअप
तक का सफर रेखा के लिए महज एक यात्रा नहीं, बल्कि अनुभवों का एक
ऐसा महासागर है जिसे उन्होंने इस किताब में समेटा है। लेखन की शुरुआत स्कूल-कॉलेज के दिनों में दोस्तों के लिए प्रेम-पत्र
लिखने से हुई, जहाँ दूसरों के जज़्बात कागज पर उतारते-उतारते उन्हें खुद
की आवाज़ मिल गई। सरकारी स्कूल की शिक्षा, इंग्लिश लिटरेचर में
एम.ए. और फिर एमबीए के बाद बैंक की नौकरी- रेखा ने हर मोड़ को
जीकर देखा है। स्पोर्ट्स में नेशनल लेवल पर ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली रेखा
आज एक सफल उद्यमी हैं, जो अपने गाँव के शुद्ध उत्पादों को देशभर में
पहुँचा रही हैं।उन्हें सोलो ट्रेकिंग और बाइक राइडिंग का जुनून है, जिसे वे अपने
जीवनसाथी के अटूट सहयोग का परिणाम मानती हैं। उनकी लेखनी ‘मुट्ठी
भर अक्षर’ साझा संग्रह किताब से लेकर ‘रेल दर्पण’ जैसी कई पत्रिकाओं में
अपनी जगह बना चुकी है। यह संस्मरण उनकी उसी बेबाक और घूमक्कड़
रूह की एक नज़्म है।

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