Sushil Kumar Pare

Sushil Kumar Pare

मुझे नहीं लगता इस किताब में ऐसा कुछ है जो आपको मालूम ही नहीं होगा या कहीं और हो ही नहीं सकता है। हाँ, एक बात ज़रूर है। एक करिअर के लिए काम आने वाली काफी कुछ चीजें एक साथ मिल जाएँगी। अपने खुद के करिअर के बारे में बोलूं तो शायद एक हिंदी गाने से बेहतर कुछ हो नहीं सकता .. ये कहाँ आ गये हम, यूँ ही साथ चलते-चलतेइंदौर, मध्य प्रदेश में जन्म। जबलपुर, इंदौर और मुंबई से होते हुए बेलगाम, कर्नाटक। पिछले 30 बरस में सेल्स से लेकर, विज्ञापन, इवेंट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, सेल्स ट्रेनिंग और अन्ततः अध्यापन। फ़िलहाल कर्नाटक लॉ सोसायटी के बेलगावी स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एजुकेशन एंड रिसर्च में प्राध्यापक। कुछ छिटपुट लेखन लगातार, खासकर करिअर के बारे में। पिछली दो किताबें मैनेजमेंट एजुकेशन के लिए। करिअर के लिए यह पहला प्रयास ।