Swayam Shrivastava

Swayam Shrivastava

स्वयं श्रीवास्तव के गीतों से आप गुज़रते हैं और थोड़ी देर में गौर करते हैं कि उनका कोई गीत आपकी बेखयाल गुनगुनाहटों का हिस्सा हो गया है। एक अरसे तक आप उनके गीतों के असर से बाहर नहीं आ पाते। स्वयं श्रीवास्तव के गीत अनुराग, स्मृति और गहन चिंतन से बने हैं। विभिन्न प्रकार के छंदों का विन्यास और उनमें भीतर ही भीतर बज रहा संगीत इन गीतों तक बारम्बार लौटा ले आता है। इन गीतों में पुराने समय, पुरानी जगहों की यादों के साथ-साथ इतिहास को मार्मिकता से गूंथा गया है। जैसे यहाँ प्रेयसी की याद है. गहरी ऐंद्रिकता है, लेकिन साथ ही अयोध्या का दुःख भी है। छोटे आकार के चुनौतीपूर्ण छंदो वाले मुक्तकों में भी स्वयं श्रीवास्तव आधुनिक बने रहते हैं और आज की आवाज़ों को उन चार पंक्तियों में ही समेट लेने का हुनर रखते हैं। छंद विधान से बाहर उनकी आज़ाद नज़्में भी इस संकलन में हैं. जो भाषा, संवेदना और शिल्प के प्रतिमानों पर पूरी उतरती हैं।

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