Vineeta Parmar

Vineeta Parmar

विनीता परमार

विनीता परमार बीस वर्षों से अधिक समय से पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यावरणीय शिक्षा से जुड़ी हुई हैं। जन्म छोड़ादानो (पूर्वी चम्पारण, बिहार) में। पर्यावरण विज्ञान में उच्च शिक्षा (पीएचडी), एमएससी (पर्यावरण विज्ञान), एमएससी (रसायन शास्त्र), एम.ए (अर्थशास्त्र), एम.एड के साथ शोध और कार्यानुभव। जनसत्ता, दैनिक जागरण, डाउन टू अर्थ, गाँव, अमर-उजाला, राजस्थान पत्रिका, अहा! जिंदगी आदि पर नियमित लेखन।

धरती का न्याय, तालाब की बेटियाँ, बाघ: विरासत और सरोकार, गर्दन हिलाती मछलियाँ, बूंद से मरुस्थल तथा धप्पा इनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं।

सैनिक साहित्य गौरव सम्मान (2024-25), पूर्वांचल कथा सम्मान 2020 एवं कमलेश्वर स्मृति कथानी सम्मान से सम्मानित।

वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय में विज्ञान शिक्षिका के रूप में कार्यरत।

मैंने पाया है कि स्मृतियाँ भी बीजों की तरह होती हैं। वे वर्षों तक मन की मिट्टी में चुपचाप पड़ी रहती हैं और फिर किसी गंध, किसी हवा, किसी पत्ती की सरसराहट या किसी पुराने तने को छूते ही अंकुरित हो उठती हैं। तब लगता है कि समय बीता नहीं है, वह केवल पेड़ों की छाल में छिपकर मेरा इंतजार कर रहा था।