Yahya Bootwala

Yahya Bootwala

बचपन में मैंने माँ से पूछा था कि कहानियाँ कहाँ से आती हैं? उन्होंने मुझे अपने पास बैठाकर कहा कि कहानियाँ हमारे इर्द-गिर्द ही घूमती रहती हैं- हर वक़्त। पर ये कहानियाँ चुप रहती हैं, कमरों में बैठी रहती हैं और ख़ुद में ख़ुद के ही क़िस्से फुसफुसाती रहती हैं। साँसों के बीच बोले गए सारे शब्द हवा में मौजूद रहते हैं और लोगों को लगता है कि उन्हें कोई सुन नहीं पाएगा। पर हवा, ये सारे शब्द अपने साथ लेकर चलती रहती है, किसी राज़ की तरह, जब तक वो किसी कहानीकार से न टकरा जाए। कहानीकारों के पास एक हुनर होता है, हवा में कहानियाँ पकड़ने का। कहानीकार हवा में मुट्ठी घुमाकर कहानियाँ पकड़ लेते हैं। और मैं आज भी इस बात को सच मानता हूँ। ये सारी कहानियाँ, मेरे बहुत पास या बहुत दूर घटी थीं। जिन्हें हवाएँ लेकर घूम रही थीं, मैंने बस बारी-बारी इन्हें अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया और कागज़ पर उकेर दिया। मुझे उम्मीद है कि ये कहानियाँ आपको पसंद आएँगी। हवा में चलती-फिरती, ये कहानियाँ आपको मुबारक!