नैनीताल का ख़ूनी डिटेक्टिव नीरजा गांधी नीरजा गांधी को एक स्कूली लड़के के ख़ूनी का अनुमान लगाना है। वह मिट चुके पद-चिह्नों, देह-हीन परछाइयों और अपनी त्रासद स्मृतियों को जोड़ती हुई उस तक पहुँच जाती है। और जब पहुँचती है तो पता चलता है वह ख़ुद ख़ूनी बुनी हुई कहानी का किरदार है। ख़ूनी की खोज एक चीज़ है, ख़ूनी के मनोविज्ञान की समझ एक अलहदा और ज़रूरी मसला है। संशय, अनिश्चय, खौफ़ और उत्सुकता की हौलनाक कहानी। शेंताल वैन मियलो का जन्म और पालन-पोषण नीदरलैंड के बॉक्सटेल में हुआ। इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जर्मनी चली आयीं और अब अपने परिवार के साथ जर्मनी के दक्षिण में एक छोटे से गाँव में रहती हैं। इस उपन्यास का प्रकाशन मूलतः डच भाषा में स्टोरीटेल पर हुआ। जब 2017 में स्टोरीटेल पर इसका पहला एपिसोड आया तो यह उस सीजन का सबसे ज्यादा सुना जाने वाला उपन्यास था। बाद में इसका प्रकाशन और भाषाओं में हुआ।