'सर, यह मणिपुर है' हिन्दी में मणिपुर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया पहला उल्लेखनीय और संवेदनशील उपन्यास है। लेखक पराग सिंघानिया ने अपने गहरे ज़मीनी अनुभवों और बेजोड़ कथा-प्रतिभा के तालमेल से एक ऐसी कहानी बुनी है, जो पाठक को अंत तक बांधे रखने में सक्षम है।
यह उपन्यास सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के इस ख़ूबसूरत राज्य के अंतर्विरोधों का एक जीवंत दस्तावेज़ है। लेखक ने अपनी सधी हुई लेखनी से मणिपुर की जादुई प्राकृतिक सुंदरता और वहाँ की समृद्ध, अनूठी संस्कृति को बहुत ही बारीकी से उभारा है। लेकिन इसके समानांतर, यह उपन्यास उस कड़वी और पथरीली सच्चाई को भी पूरी ईमानदारी से सामने लाता है।