Mujtaba Khan

Mujtaba Khan

मुज्तबा ख़ान का ताल्लुक़ रामपुर उत्तर प्रदेश से है। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बारहवीं की और वहाँ उन्हें नायाब तर्बियत मिली। मुज्तबा ने वैसे तो इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है वो सिर्फ़ इसीलिए क्यूँकि “पापा कहते हैं बढ़ा नाम करेगा, कोई इंजीनियर का काम करेगा” । कुछ वक़्त दुबई में नौकरी भी की। फिर उससे नाखुश होकर वापस आकर एल.एल.बी. की पढ़ाई शुरू की लेकिन उसे पूरा नहीं किया। ख़ुद को ढूँढते-ढूँढते कोविड के वक़्त जब घर वापस जाना हुआ तो अपनी दादी अम्मी की बात याद आई कि “बेटे तुम्हारे नाक कान से बातें झड़ती हैं” । फिर दादी के दौर की कहानियाँ लिखनी शुरू कीं और इंस्टाग्राम पर 'सब्र से ' के नाम से पेज बनाया, जिसके ज़रिये छोटी-छोटी कहानियाँ सुनाने लगे। फ़िलहाल बंबई में रह कर स्पोकन उर्दू वर्कशॉप लेते हैं और अलग-अलग माध्यम से लोगों को अपनी कहानियाँ भी सुनाते हैं।

Books by Mujtaba Khan