वो एक भगोड़े आतंकवादी की पत्नी थी। वह एक शातिर राजनेता का बेटा था। वो कश्मीर के एक लोकप्रिय अख़बार की संवाददाता थी । वह भारतीय सेना का एक सख़्तजान पैरा कमांडो था । आर्टिकल 370 के हटने के बाद बदलते हुए कश्मीर की वादियों में उन दोनों की दोस्ती हुई। धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ने लगी, वो उसके लिए दुश्मनों के ठिकाने की ख़बर लाने लगी और वो उन दुश्मनों पर कहर बनकर टूटने लगा। फिर दोस्ती, मुहब्बत, जज़्बा, नैतिकता और समर्पण आपस में गड्डमड्ड होकर एक ऐसी कहानी को सामने लाए, जिसमें सही और ग़लत का भेद कर पाना ही नामुमकिन हो गया।