देश में कोई ऐसा नहीं होगा जिसने भगत सिंह का नाम न सुना हो। जब भी ये नाम आता है जेहन में एक ऐसे नौजवान की तस्वीर उभरती है, जिसकी आँखो में देश को कैसे भी आज़ाद कराने का जुनून है, वो बस ब्रितानिया हुकूमत को उखाड़ फेकना चाहता है।
पर क्या भगत सिंह का किरदार यहीं तक सीमित है?
मुझे याद है कि कानपुर की लाइब्रेरी में भगत सिंह पर आधारित एक किताब पढ़ी थी। रात भर में किताब ख़त्म हो गई। पर भगत सिंह के बारे जानने की भूख ख़त्म न हुई। मैंने उन पर आधारित लेख पढ़े, किताबें खोजी, सिनेमा देखा।
सबसे ज़्यादा प्रभावित किया उनकी समाजवादी सोच ने, भगत सिंह मज़दूरों की हक़ बात कर रहे थे, कौमी एकता के हिमायती थे, और सामंतवाद के ख़िलाफ़ थे। 23 साल की उम्र में इतनी परिपक्वता चकित करती है।
मैं तब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दृश्य कला में स्रातक की पढ़ाई कर रहा था। मुझे लगा कि भगत सिंह पर एक कॉमिक्स बनानी चाहिए, फलस्वरूप यह किताब बनी जो अभी आपके हाथ में है।
भगत सिंह के प्रति मेरे मन में जितना सम्मान और प्रेम है मुझे नहीं पता कि मैं उनके जीवन और विचारों को प्रस्तुत करते हुए कितना न्याय कर पाया हूँ, पर मेरी कोशिश यही रही है कि इस बहाने हम उस नौजवान को याद कर पाएँ जो बस 23 साल की उम्र में देश के लिए फाँसी के फंदे पर झूल गया।
आशा है आपको मेरा ये प्रयास पसंद आएगा।
-रवि गुप्ता