क्वांटम कंप्यूटर सिर्फ एक नई मशीन नहीं, कंप्यूटर साइंस की अलग समझदारी है। अभी के सारे कंप्यूटर, चाहे वे सुप कंप्यूटर ही क्यों न हों, अतिम निष्कर्ष में दिमागी कोशिकाओं (सेरीब्रल न्यूरॉन्स) के गुच्छों जैसे ही हैं। उनका काम है, कुछेक इनपुट्स को खास शर्तों के मुताबिक प्रॉसेस करके एक सटीक आउटपुट देना। लेकिन सन 2030 तक मिल सकने वाली दस हजार क्यूबिट की रेंज वाला नहीं, अगले पचास वर्षों में 10 लाख क्यूबिट तक की ताकत संजो लेने वाला क्वांटम कंप्यूटर बाकायदा इंसानी दिमाग की तरह काम कर सकेगा। बदलती हुई शर्तों के साथ इनपुट और आउटपुट की अनेक श्रृंखलाओं को एक साथ प्रॉसेस करते हुए समस्याओं का सर्वश्रेष्ठ संभव समाधान खोजना। कला से लेकर विज्ञान तक मनुष्य से एक कदम आगे सोच सकने वाला ऐसा सलीकेदार क्वांटम कंप्यूटर अभी दूर है, लेकिन सदी बीतने तक वह हमारे सामने होगा।