सिंहासन बत्तीसी' भारतीय लोक-कथाओं का एक ऐसा अनमोल रत्न है, जो सदियों से नीति, वीरता और न्याय के आदर्श प्रस्तुत करता आ रहा है। यह कथा संग्रह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि एक महान राजा के गुणों की कसौटी है । 'सिंहासन बत्तीसी' का सीधा संबंध महाराजा विक्रमादित्य से है, जो अपनी न्यायप्रियता, साहस और दानशीलता के लिए भारतीय इतिहास में अमर हैं ।
सिंहासन बत्तीसी हमें यह संदेश देती है कि पद या सिंहासन केवल शक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह महान चरित्र और उत्तरदायित्व की माँग करता है ।
राजा भोज के माध्यम से पुतलियाँ संसार को यह सिखाती हैं कि शासन करने का अधिकार उसी को है, जिसका हृदय विक्रमादित्य की भांति निर्मल और परोपकारी हो ।