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Bachche Masheen Nahin Hain | बच्चे मशीनें नहीं हैं By Alok Kumar Mishra

Rs. 359
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शिक्षा सिर्फ़ विद्यार्थियों का प्रश्न नहीं है, यह हमारे नागरिक भविष्य और मनुष्यता का मसला है । यह किताब शिक्षा व उससे जुड़े विषयों को इसी ज़मीन से देखती है । यह बड़े-बड़े सिद्धांतों के परकोटे से शिक्षा को देखने की बजाय बाल-मनोविज्ञान और हमारे दैनंदिन सामाजिक जीवन के भीतर से अपने सूत्र विकसित करती है। इसके चलते यह अध्यापकों के लिए उपयोगी होने के साथ आम विचारशील लोगों के लिए भी रोचक बन उठी है। इसकी सादगी प्रभावित और ईमानदारी कनविन्स करती है ।

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Book Details

Publisher Unbound Script
Genre Education, Self-help & personal development, Society & culture, Humanistic Approach, Human Psychology, Parenting, Child Development, and Mental Wellness
Edition 1st
ISBN 9788197664564
Year 2025
Format Paperback
Pages 214
Language Hindi

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DURGESHWAR RAI
शिक्षक की वास्तविक शिक्षकीय चिंता है बच्चे मशीन नहीं हैं।

आलोक कुमार मिश्रा जी की यह पुस्तक ‘बच्चे मशीन नहीं हैं’ एक शिक्षक के हृदय की धड़कन और एक सजग आलोचक की सामाजिक प्रतिबद्धता का संकलन है। यह पुस्तक हमें एक ऐसी दुनिया का सपना देखने की ताकत देती है जहाँ बचपन बाज़ार और व्यवस्था की यांत्रिकता से मुक्त होकर अपनी पूरी सहजता, स्वतंत्रता और मनुष्यता के साथ खिल सके। यह समकालीन हिंदी गद्य और वैचारिक लेखन की एक अनिवार्य और बेहद मूल्यवान उपलब्धि है।