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Aatanki Mor | आतंकी मोर By Ankita Jain

Rs. 179
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इस बाल उपन्यास में बच्चों के साहस और जिज्ञासा की दुनिया खुलती है. इसमें दो बच्चे हैं- चीनू और मीनू. वो दोनों शहर से अपने नानी के गाँव जाते हैं और वहाँ मोरों के बहाने बच्चों के अपहरण करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हैं. यह बहुत आसान भाषा में लिखी गयी जासूसी कहानी है. इसके नायक बच्चे हैं. इसमें गाँव का जीवन, प्रकृति, आपसी जुड़ाव सब कुछ सामने आता है. पढ़ने में इतनी सरस है कि पाठक बस पेज़-दर-पेज़ पढ़ता ही चला जाए. इसकी लेखिका अंकिता जैन हिंदी की प्रतिष्ठित युवा कथाकार हैं. यह उनकी छठीं किताब है. उनकी रचनाएँ हिंदी की प्उरतिष्न्हेंठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं. उन्हें 'मेदनी' पुरस्कार सहित अनेक महत्त्वपूर्ण सम्मान मिल चुके हैं.

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Book Details

Publisher Unbound Script
Genre Children, Suspense, humor, childrens fiction, and Action & adventure
Edition 1st
ISBN 9788119745265
Year 2023
Format Paperback
Pages 128
Language Hindi

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  • 5 stars: 4 (100%)
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N
Neelam srivastava
मोर और आतंक ? राज़ है 😀

पाठक को बांध कर रखने वाली पुस्तक है। ये बच्चों के मन में अंत तक जिज्ञासा बनाए रखती है जिसके कारण वे पूरी कहानी पढ़ते हैं। टीवी और मोबाइल से थोड़ी दूरी बनाने के लिए आवश्यक है कि बच्चों को ऐसे बाल उपन्यास पढ़ने के लिए प्रेरित करें। लेखिका की कल्पनाशक्ति सराहनीय है।

S
Shivam Agrahari
Awesome

So lovely book....good suspenseLoved reading itI will recommend it to students and parents tooThanku Ankita Mam for writing so beautiful book

ब
बहुत बढ़िया लिखा हैं
बड़ियां

बहुत अच्छी लिखी हैं। बहुत अच्छे से दरसाया हैं।बहुत अच्छे से विवरण किया हैं।बहुत ही शानदार हैं ये।

S
Siddhartha
शानदार लेखन, बेहतरीन प्रस्तुति

वैसे तो शायद बाल मन की समझ और चंचलता के अनुरूप और उनको मनोरंजक रचनात्मकता प्रदान करने के लिए किया गया प्रयास है 'आतंकी मोर'। लेकिन फिर भी मैंने क़रीब एक घंटे में पूरी ख़त्म की यह किताब। वो ननिहाल जाने का उत्साह, बाल निश्छलता, छोटी शरारतें, नादान मन, उत्साही बचपन और जासूस बन कर दुनिया बचाने का जुनून, ऐसा लगा कि दफ़्तर से घर नहीं बचपन में आ गया मैं। क्योंकि अद्वैत और सर्वात्मिका सरीखे नौनिहालों के लिए लिखी गई किताब है तो भाषा बेहद सरल और शब्द बेहद रोज़-मर्रा के रखे आपने लेकिन फिर भी कहानी ने बाँध कर रखा पूरे समय।बच्चों के लिए तो बेहद अनुशंसित पुस्तक और बाक़ी पाठक किसी छोटी यात्रा में, या दिमाग़ पर एकदम बोझ ना डालते हुए हल्के-फुलके मनोरंजन के लिए पढ़ सकते हैं। आपको बधाई ना सिर्फ़ शानदार लेखन के लिये बल्कि बाल-कहानियों के नये से परिक्षेत्र में पहले कदम के लिए भी।।