Phool Padh Rahe Hai + Ootpatang
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Phool Padh Rahe Hai | फूल पड़ रहे हैं - यहाँ फूल किताबें पढ़ रहे हैं।
उन पर बैठी तितलियाँ खुली हुई किताबें हैं।
और भौरों की गुंजार उनके द्वारा याद किया जा रहा सबक ।
Ootpatang | उटपटांग - मुहावरे किसी जीवंत भाषा की जान होते हैं। इन्हें सिर्फ़ अर्थ और व्याकरण ज्ञान से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इनके सही भाव तक पहुँचने के लिए व्यवहार और संदर्भ को समझना ज़रूरी होता है ।
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| Publisher | Unbound Script |
| Genre | Children |
| Year | 2025 |
| Format | Paperback |
| Language | Hindi |