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Lekhak Kaise Banein | लेखक कैसे बनें By Ruskin Bond

Rs. 179
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लेखक कैसे बनें” रस्किन बॉन्ड द्वारा लिखित एक पुस्तक है, जो उन महत्वाकांक्षी लेखकों के लिए मार्गदर्शन और सुझाव प्रदान करती है जो अपने लेखन कौशल में सुधार करना चाहते हैं और लेखन में अपना करियर बनाना चाहते हैं। पुस्तक में लेखन के विभिन्न पहलुओं जैसे चरित्र विकास, कथानक निर्माण, सेटिंग को शामिल किया गया है। , संवाद और कथन। बॉन्ड एक लेखक के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करता है और लेखन की कला पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

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Book Details

Publisher Unbound Script
Genre Education, Self-help & personal development, and Literature
Edition 3rd
ISBN 9788195124114
Year 2021
Format Paperback
Pages 120
Language Hindi

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  • 5 stars: 10 (91%)
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m
mahesh osho
नए लेखकों के लिए

Ruskin Bond जो एक बहुत ही अच्छे लेखक हैं अगर वो कुछ नए लेखकों के लिए लिखेंगे तो वो बहुत ही जबर्दस्त होगा । किसी अनुभवी की मदद लेना बुरा नहीं है और इस किताब में उन्होंने बहुत मदद की है लेखकों के लिए बिना मार्गदर्शक के टाइम भी बहुत ज्यादा होता है और हम भटक भी जाते हैं। ये किताब हर लेखक के लिए बहुत ही अच्छी है हर किसी को पढ़नी चाहिए ।महेश ओशो8-1-2025Sangam vihar New Delhi

K
Kindle Customer
किशोर लेखकों के लिए पहली किताब

मैं साहित्य-पाठक के तौर पर कभी किशोर रहा ही नहीं! या यों कहें कि हमारे आसपास किशोर साहित्य की बेहद कमी थी। इसलिए जब दुनिया भर के अनगिनत महान कथाकारों को पढ़ चुका तब अपने देश के प्रसिद्ध कथाकार रस्किन बांड को पढ़ने का मौक़ा आया। वह भी उनकी कहानी पर बनी, पंकज कपूर व दीपक डोबरियाल अभिनीत, खूबसूरत फ़िल्म 'द ब्लू अम्ब्रेला' देखने के बाद! लेकिन पढ़ने के बाद लगा कि किशोरों के दद्दू में जबर्दस्त पर्यवेक्षण क्षमता है। और साथ ही इस वय में भी किशोर कौतुक, भावाकुलता, कल्पनाशीलता और नवोन्मेषी जिज्ञासों में उतर सकते हैं। जो सामान्यतः उम्र बढ़ने के साथ लोगों से छूटती जाती है। कहते हुए हिचक रहा हूँ, लेकिन मन नहीं मान रहा है, मुझे बांड कुछ-कुछ अपने विनोद कुमार शुक्ल जैसे लगे! शायद पर्यवेक्षण, कौतुक और अपूर्व कल्पनाशीलता के नाते। या शायद इसलिए भी कि विनोद कुमार शुक्लजी ने भी हिंदी में किशोरों के लिए उल्लेखनीय काम किया है।लेखक और कलाकार बनाने वाली किताबों और कार्यशालाओं में मेरी कोई रुचि नहीं है। आज तक मैं ऐसी किसी कार्यशाला में शामिल नहीं हुआ न ही इसके पहले ऐसी कोई किताब पढ़ी(क्या पता पढ़ता तो लिखना भी सीख लेता)। हाँ, कविता कैसे पढ़ें और पेंटिंग कैसे देखें, इसपर कहीं कुछ मिल जाए तो पढ़ लेता हूँ। मुझे लगा था कि यह कोई बोरिंग सी किताब होगी, जैसे स्नातक के सिलेबस में रचनात्मक लेखन सिखाने वाली किताबें होती हैं, इसलिए अनमने ढंग से पढ़ना शुरू किया। लेकिन मेरी धारणाओं के उलट यह किताब सहज और मज़ेदार लगी। कारण कि यह लिखने के बारे में कोई सिद्धांत नहीं बताती, बल्कि अपने और दूसरे महान लेखकों के छोटे-छोटे संस्मरणों, रचनाओं व चरित्रों की तुलना से उनके वैशिष्ट्य को बहुत अनौपचारिक ढंग से खोलती चलती है।यह किताब दरअसल कथालेखन के बारे में है। उसके चरित्रों, शैली और जॉनर आदि पर बहुत सहजता से व्यवहारिक और सारवान बातें करती है। लेकिन मैं शायद अच्छा कथा-प्रेमी नहीं हूँ, इसलिए सबसे ज्यादा ध्यान गया भाषा वाले अंश पर। बांड रचनात्मक भाषा के बारे में बहुत आत्मीयता से सुझाव देते हैं, जैसे कोई वरिष्ठ पीठ पर हाथ रखकर समझा रहा हो, "अपने शब्दों और वाक्यों को सरल रखें। स्पष्टता से बोलें और लिखें। जो अस्पष्टता पहले से ही चारों ओर फैला है उसमें और बढ़ोत्तरी न करें।" मैं जानता हूँ, इसे पढ़कर मेरे दोस्त भी कहेंगे कि यह तो तुम्हारे लिए कही गई बात है!बांड रचनात्मक भाषा सीखने के लिए एक मज़ेदार खेला बताते हैं: “भारी भरकम शब्दकोश शब्दों से भरा हुआ है। उसे खोलकर कोई भी शब्द चुन लें। कोई भी शब्द लें-बिना सोचे समझे- और देखें कि आप उसको कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। या दूसरे लोगों ने इसका कैसे इस्तेमाल किया है।”मैंने शब्दकोश खोलकर कभी ऐसा तो नहीं किया, लेकिन जब कोई नया शब्द कहीं पढ़ता या सुनता हूँ तो उसके उपयुक्त प्रयोग के बारे में ज़रूर सोचता हूँ, और जब पहली बार उसका प्रयोग कर लेता हूँ तो प्रसन्नता होती है। मैं आपको एक बात बताऊँ, मुझे बहुत से शब्दों के साथ वह माहौल याद है, जब मैंने पहली बार उसे पढ़ा या सुना। जब मैंने पाँचवीं क्लास में अपने एक रिश्तेदार के मुँह से 'दिक़्क़त' शब्द सुना तो दिनभर तालू से जीभ चटकाते घूमता रहा-दि..क़्क़त !बांड एक जगह बताते हैं कि "मैं लेखन से बहुत पैसा कमाने का विचार लेकर नहीं चला था। मैं जानता था कि मैं वैसा लेखक नहीं हूँ। मगर मुझे यही काम अच्छे से करना आता और मैं अपनी इस प्रतिभा का इस्तेमाल करते डटा रहा।" और आज यह लेखक, आप जो भी कहिए इसके बारे में, लेकिन दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधि लेखक है और इसे बहुत प्यार मिला है बच्चों और किशोरों से। इन वाक्यों में छिपी सच्चाई और साहस ने मुझे भी आत्मबल दिया। वैसे मैं अबतक नहीं जानता कि मैं क्या अच्छे से कर सकता हूँ! इसी किताब में एक जगह, मैं वह अंश खोज नहीं पा रहा हूँ, कहते हैं कि मुझे इस उम्र में अपने जीवन से संतोष है कि मैंने वह किया जीवन में जो मैं सच में करना चाहता था। और उससे भी आगे अपने सबसे प्रिय काम करने से मेरा पेट भी पलता रहा। अगर मैं अपनी जिंदगी में यह तय न करता कि मुझे अपना पसंदीदा काम करना है तो आज पेंशनयाफ़्ता किसी कोने में जिंदगी गुजार रहा होता। जो मुझे अपने बारे में बिल्कुल पसंद नहीं होता। यह शायद हिंदी के लेखकों के लिए उतनी व्यवहारिक बात न हो लेकिन इसमें कुछ ऐसा आकर्षण है कि मैं इसे बार बार पढ़ता रहा।मैं तो अपने किशोर मित्रों को, जो अपने भीतर लेखकीय क्षमता महसूस करते हैं, उन्हें इस किताब तक पहुंचाने के लिए लिख रहा हूँ। पढ़ने को कोई भी पढ़ सकता है। इसमें बहुत कुछ है सीखने को। पढ़िए, एक बैठकी में पढ़ सकते हैं, और पाने के लिए कॉमेंट बॉक्स में दिए लिंक पर जा सकते हैं।

R
Ravi Dwivedi
Average

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v
vaibhav
Good

Good

a
anand kumar mishra
अच्छी किताब

लेखन, अनुवाद एवं संपादन सब बहुत व्यवस्थित है।पढ़ने में सहज एवं ज्ञानवर्धक है।

D
Dr.Khalid Akhtar Alig
very nice

This book is very illustrated and elaborates on the technique of Writing skills. it is very useful.

R
RH
Excellent

Excellent

R
Ram Vishwakarma
बेहतरीन

आसान शब्दों में महान लेख।

D
Dhruw chand
खूबसूरत बुक, उनके लिए जो लेखक बनना चाहते हैं।

मैं एक लेखक हूं।

P
Pulak
Splendid translation

Such a smooth translation that one can listen to the author speaking in a different language.