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Mithauwa | मिठउवा By Ashtbhuja Shukla

Rs. 179
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मिठउवा - अष्टभुजा शुक्ल के ललित निबंध सिर्फ ललित नहीं हैं। ये अपनी अन्तर्वस्तु में पाठक को हमारे समय की असाध्य समस्याओं, जीवन के जटिल और बीहड़ पथों तक ले जाते हैं। उनके निबंधों में गजब की आन्तरिक संगति है और इनमें अष्टभुजा शुक्ल लेखक के रूप में भी किसान लगते हैं। सरोकारों, स्थितियों से जूझते हुए, वंचित जन के साथ जीवन - क्षेत्र में कुदाल–कलम से जोतते-खोदते हुए। सो अष्टभुजा शुक्ल हिन्दी गद्य को समर्थतर बनाने वाले सिर्फ गद्यकार नहीं समर्थ कवि सक्षम गद्यकार हैं। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा को देखते हुए कौन कहता है कि हिन्दी गद्य में बाणभट्ट की संभावना नहीं है। -विश्वनाथ त्रिपाठी आवरण के चित्रकार 'पद्मश्री' भज्जू श्याम गोंड चित्रकला के लिए सुविख्यात प्रधान गोंड परिवार की नयी पीढ़ी के चित्रकार हैं। उनके चित्र भारत भवन समेत देश और विदेश में अनेक जगह प्रदर्शित हुए हैं। भज्जू ने पारंपरिक गोंड चित्रकला में आधुनिक आयाम जोड़कर उसका विस्तार किया है। लंदन यात्रा पर आधारित उनकी बहुचर्चित पुस्तक - 'द लन्दन जंगल बुक' इटैलियन, डच, फ्रेंच, कोरियन और पुर्तगाली भाषाओं में भी प्रकाशित हुई है।

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Book Details

Publisher Unbound Script
Genre Religion & spirituality, Self-help & personal development, Literature, Essays / Short Prose Collection, Love For Nature , memoir, satire, Humor & comedy, and Biography
Edition 1st
ISBN 9789348497642
Year 2025
Format Paperback
Pages 120
Language Hindi

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