Skip to product information
 
                
Exclusive Tyndale.com Preview
           
          
       
         

Information

                 
       
         

Add additional descriptions, sizing guides, or brand info here.

       
     
   
 

Kabootarbaaz | कबूतरबाज़ By Vinay Sultan & Sumit Singh

Rs. 314
Rs. 349
Save 10%
In Stock

अय्यारों से लेकर यारों तक और जहाज़ियों से लेकर सिपहसालारों तक, प्यार और जंग में इंसानों का दम भर साथ दिया है कबूतरों ने। भला हो उन इतिहास की किताबों का जो न लिखी गईं और न कबूतरों ने पढ़ीं, वरना कबूतरों के जत्थे अपने पुरखों की सेवा का हिसाब लेने हमारे बारजों पर यूं भी चले ही आते। क्या मालूम आपकी बालकनी का कबूतर ऐसा ही कुछ पूछने की कोशिश में हो। फिर भी कबूतर हैरान तो होते होंगे कि शहर क़स्बों की दीवारों पर हकीम लुकमानी जैसों के ठीक बाद 'कबूतर जाली लगवायें' के इश्तिहार आख़िर क्यों कर लग गए हैं? हमारे हिस्से हैरानी का ये सिरा आया कि सदियों पुरानी और दुनिया भर में आज भी खेली जा रही कबूतरबाज़ी की ज़मीन पर हमने अब तक कहानियाँ क्यों नहीं रोपीं? नतीजा, पुलिस बैंड में ट्रम्पेट बजाने वाले हेड कांस्टेबल एकईस राम और उनके कबूतरबाज़ बेटे कबीर के गिर्द घटती कहानी हम आपकी नज़र कर रहे हैं। पुराने किले और गंगा के दोआब पर कबूतरों वाले आसमान के नीचे उपजा ये उपन्यास कबूतरों या कबूतरबाज़ों भर की कहानी नहीं है, ये हमारी आपकी कहानी है। कबूतरों ने तो सिर्फ़ आईना दिखाया है, क्योंकि यही तो वे करते आए हैं सैकड़ों बरसों से.... और कबूतरबाज़ भी ...

Frequently Bought Together

Recommended products for this item

Bundle Total Rs. 314

Check delivery availability

Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Family, Literature, Traditional Folk Stories, emotional, Historical fiction, Cultural Heritage, History, Fantasy, Comics & graphic novels, and Action & adventure
Edition 1st
ISBN 9789348497710
Year 2025
Format Paperback
Pages 259
Language Hindi

You may also like