Atirikt Shunya | अतिरिक्त शून्य By Amit Upmanyu

Atirikt Shunya | अतिरिक्त शून्य By Amit Upmanyu

Sale price  Rs. 159 Regular price  Rs. 199
Skip to product information
 
                
Exclusive Tyndale.com Preview
           
          
       
         

Information

                 
       
         

Add additional descriptions, sizing guides, or brand info here.

       
     
   
 

Atirikt Shunya | अतिरिक्त शून्य By Amit Upmanyu

Rs. 159
Rs. 199
Save 20%
In Stock

हमारे समय की निर्मम और नंगी सच्चाइयों को व्यक्त करने के लिये अमित उपमन्यु की कविता अलग-अलग कई रास्तों की तलाश करती है। उसके लिये जीवन को जानना एक अंतहीन और सतत
प्रक्रिया है। उसके लिये यह दौर समय के माथे का एक ऐसा फोड़ा है, जिससे लगातार मवाद रिस रही है। वर्तमान एक नरक है, जिसमें रोम-रोम दु:ख रहा है। अमित की कविता मुखर वाग्मिता से परहेज नहीं करती लेकिन इसके साथ ही वह पौराणिक आख्यानों के संदर्भों और स्मृतियों के पास जाकर अपने समय का एक नया पाठ भी तैयार करती है। यह ऐसा पाठ है, जिसमें मिथकों और आज की वास्तविकताओं से एक नये अर्थ की सृष्टि होती है।
अमित उपमन्यु की कविता में बाहर और भीतर के बीच एक निरन्तर
चलती आवाजाही है। एक रिश्ता है, मन के भीतर और बाहर का। एक ब्रह्माण्ड है, जिसमें जो पृथ्वी है उसमें एक घर है, जिसमें वह रहता है लेकिन इस मन के भीतर एक और मन है, जिसमें वह अपना घर बना रहा है। इस घर के भीतर एक ब्रह्माण्ड है और इस ब्रह्माण्ड में एक और पृथ्वी है, जिस पृथ्वी पर वह बेघर भटक रहा है। अमित की इन कविताओं में बाहर और भीतर के बीच द्वन्द्व भी है और निरन्तर आवाजाही भी ।
राजेश जोशी

Check delivery availability

Book Details

Publisher Yuvaan Books
Edition 1ST
ISBN 9788169235167
Year 2026
Format Paperback
Pages 104
Language Hindi

You may also like