Phool Padh Rahe Hai | फूल पड़ रहे हैं By Dhruva Shukla
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यहाँ फूल किताबें पढ़ रहे हैं।
उनपर बैठी तितलियाँ खुली हुई किताबें हैं।
और भौरों की गुंजार उनके द्वारा याद किया जा रहा सबक ।
कद्दू दबे पाँव छप्पर पर चढ़ रहे हैं
और फिर अपने भारी फलों के साथ छप्परों को तोड़ डालते हैं ।
बच्चे अक्षरों और शब्दों के बीज बोते हैं,
जो भाषा का पेड़ बन जाता है।
बच्चे इसके वाक्यों की टहनी पर कविताओं के घोंसले बनाते हैं।
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| Publisher | Unbound Script |
| Genre | Literature and Education |
| Edition | 1ST |
| ISBN | 9789347125508 |
| Year | 2026 |
| Format | Paperback |
| Pages | 64 |
| Language | Hindi |