The Champak Story Box - 1 - ये कहानियाँ - वास्तविक जीवन में परेशान करने वाले प्रश्नों का जवाब ढूंढने में मदद करेंगी - शब्द भंडार और एकाग्रता को बढ़ाएंगी - भाषा, तार्किकता और क्षमता का विकास करेगी - बहुत मज़ेदार ढंग से भावनात्मक और ज्ञानात्मक क्षमता का विकास करेगी।
The Champak Story Box - 2 - खोलिए कहानियों का ख़जाना! इसका हर पन्ना एक नयी दुनिया का दरवाज़ा है। जोरम बन्दर अपने उदार और समझदार व्यवहार से बाकी जानवरों का दिल जीत लेता है। डिनो गधा और रिंकू चूहे ने समझ लिया कि घास हमेशा हरी होती है और दूसरी तरफ़ दोनों ने अपनी ताक़त भी पहचानी। ऐली हाथी उड़ना चाहती थी
The Champak Story Box - 3 - खोलिए कहानियों का ख़ज़ाना ! अपने परिवार और दोस्तों संग रोमांचक यात्राओं का मज़ा लीजिए। बहन-भाइयों संग दुनिया बचाने के मिशन पर निकलें। दोस्तों और टीचर के संग हँसी-मज़ाक ।
The Champak Story Box - 4 - इस स्टोरी बॉक्स में है बिल्कुल असली चंपक कहानियों का ख़ज़ाना : बस जुट जाओ! किताब के पन्ने खोलो और तुम्हें मिलेंगे रियो, कनखजूरा जो भूल गया था कि उसके सैकड़ों पैरों में से दर्द किसमें है। लालचेश्वर, कुरिकापल्ली का लालची पुजारी जिसे मिला सबक प्लूटो, नया ग्रह, जिसने बाकी सारे ग्रहों को चिंता में डाल दिया।
The Champak Story Box - 5 - इस स्टोरी बॉक्स में है बिल्कुल असली चंपक कहानियों का ख़ज़ाना; बस जुट जाओ! किताब के पन्ने खोलो और तुम्हें मिलेंगे शेरसिंह, चंपकवन का राजा, जो बलवान है और ताकतवर भी, लेकिन सबको समान नज़र से देखता है और गलतियाँ होने पर मानता भी है।
Rangbhoomi | रंगभूमि - अंधे भिखारी सूरदास के पास एक ज़मीन है, जो पूरे गाँव के पशुओं की चारागाह है। जॉन सेवक उस पर सिगार का कारखाना लगाना चाहता है। अकेला सूरदास गाँव के लिए उस ज़मीन को बचाने की लड़ाई लड़ता है। इस लड़ाई में वह राजा, पूंजीपति, गाँव के षड्यंत्रकारियों और शहरी न्यायतंत्र से लड़ता हुआ शहीद होता है।
Premashram | प्रेमाश्रम - काशी के जमींदार परिवार के मुखिया प्रभाशंकर और भतीजे ज्ञानशंकर की जमींदारी में लखनपुर एक गाँव है। 'प्रेमाश्रम' उपन्यास में प्रेमचंद लखनपुर के लोगों की व्यथा कथा लिखते हैं कि कैसे अपने आसामी किसानों के उत्पीड़न से बेपरवाह जमींदार अपनी ही रासलीलाओं में मगन हैं।
Nirmala | निर्मला - मुंशी प्रेमचंद हिन्दी उपन्यास को जासूसी, अय्यारी और पौराणिक कथानकों से निकालकर वास्तविक सामाजिक विषयों तक ले आये। इसमें उनका केन्द्रीय प्रश्न हमारे समाज की आधारी आबादी, यानी की स्त्रियों की समस्याएं थीं। आज आपको शायद यह बात उतनी बड़ी न लगती हो, लेकिन साहित्य में यह एक बड़ा प्रस्थान है।
Godan | गोदान - गोदान' स्वंत्रतापूर्व भारतीय ग्रामीण जीवन का विश्वसनीय और सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। जमींदारी, साहूकारी और धार्मिक-सामाजिक दबाव कैसे छोटे और मझोले किसानों को कुचलकर नेस्तोनाबूद करते हैं, यह प्रेमचंद ने अपने इस उपन्यास में बड़ी सच्चाई से दर्ज किया है। इस उपन्यास में जहाँ कथित उच्च वर्ग के खोखले और निर्मम स्वरूप को उघाड़कर रख दिया गया है वहीं विधवा-विवाह और जाति समस्या पर भी विचारोत्तेजक बहसें हैं।
Karmabhoomi | कर्मभूमि - 'कर्मभूमि' गाँव और शहर में आ रहे बदलावों की कथा एक साथ कहता हुआ उपन्यास है। गाँव में बढ़ते लगान की चक्की में पिसते गरीब किसान हैं, और उनके ही धन से विलासिता का जीवन जीते जमींदार और उसके कारिदे हैं। किसानों को एक संगठित आंदोलन चाहिए ताकि इस शोषण चक्र से निजात मिले।
Gaban | गबन - 'गबन' की नायिका जालपा का बचपन से एक सपना है—उसे माँ के जैसा ही चंद्रहार मिले। इस स्वप्न के इर्द-गिर्द प्रेमचंद भारतीय मध्यवर्ग के पतन की कथा लिखते हैं। जालपा का स्वर्णाभूषणों के प्रति अतार्किक प्रेम नायक रमानाथ को भ्रष्टाचार की ओर इतना ले जाता है कि वह अन्ततः निर्दोषों को सज़ा कराने के लिए झूठा सरकारी गवाह तक बनने को तैयार हो जाता है; यह 'गबन' की कथा है।
Seva Sadan | सेवा सदन - कहने को बहुत सारे पात्र हैं, उनके बदलने की परिस्थितियाँ हैं, उनका जटिल जीवन-चक्र भी है। लेकिन प्रेमचंद का उपन्यास 'सेवासदन' सुमन की कहानी है।
Kankaal | कंकाल - कंकाल जयशंकर प्रसाद का पहला उपन्यास है। इसका रचनाकाल 1929 है। इस लिहाज से देखें तो यह सदी भर पुराना उपन्यास है। किसी पाठक के मन में यह सहज ही आ सकता है कि इतने पुराने उपन्यास में उसके लिए क्या होगा
Titli | तितली - तितली एक ग्राम-कथा है, लेकिन इसे ग्राम्य कथा नहीं समझना चाहिए। इसकी कथा संरचना में भले ही बजरिया, शेरकोट और छावनी हो, वहाँ की गरीबी, जहालत, सामंती शोषण और अंततः ग्राम-सुधार हो, लेकिन जयशंकर प्रसाद इस सब को पश्चिमी और भारतीय जीवन-दर्शन के द्वन्द्व तक ले जाते हैं।
Gunda aur Anay Kahaniyaan | गुंडा तथा अन्य कहानियाँ - जयशंकर प्रसाद कहानियों की अपनी भाषा और शिल्प में शास्त्रीयतावादी मालूम पड़ते हैं। ऊपर से देखने पर उनकी संस्कृतनिष्ठ भाषा और राजा, नवाब और धनिकों की कहानियाँ ऐसा आभास देती भी हैं। ज़रा गहराई से देखें कि उनकी कहानियों के केन्द्रीय पात्र कौन ह? आपको मिलेगा कि बलूच और इरानी बंजारे, मुसहर, गुंडे, हाथ की सफाई दिखाने वाले, जलदस्यु, नगरवधुएँ और भूमिहीन- सताए हुए लोग उनकी कहानियों के नायक नायिकाएं हैं। इन कहानियों में उनका चरित्र उदात्त, क्षमाशील और कथित उच्च वर्ग की तुलना में कहीं अधिक मानवीय है। इसके उलट धनिक और राजे महाराजे कमज़ोर और छुद्र दिखाई देंगे। दूसरे अनेक कारणों के साथ यह तत्व भी जयशंकर प्रसाद की कहानियों को क्लासिक और भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर बनाता है ।