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Godan | गोदान By Munshi Premchand

Rs. 248
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गोदान' स्वंत्रतापूर्व भारतीय ग्रामीण जीवन का विश्वसनीय और सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। जमींदारी, साहूकारी और धार्मिक-सामाजिक दबाव कैसे छोटे और मझोले किसानों को कुचलकर नेस्तोनाबूद करते हैं, यह प्रेमचंद ने अपने इस उपन्यास में बड़ी सच्चाई से दर्ज किया है। इस उपन्यास में जहाँ कथित उच्च वर्ग के खोखले और निर्मम स्वरूप को उघाड़कर रख दिया गया है वहीं विधवा-विवाह और जाति समस्या पर भी विचारोत्तेजक बहसें हैं। उपन्यास के स्त्री पात्रों के विकासक्रम को देखें तो प्रेमचंद अपने युग के प्रमुख स्त्रीवादी कथाकार ठहरते हैं। कथानायक होरी अपने जटिल जीवन के बीच से, एक गाय पाल लेने का अधूरा स्वप्न लिये-लिये विदा हो जाता है। यह इस उपन्यास की प्रमुख कथा है। इससे जुड़ी हुई अनेक उपकथाएँ हैं, जो मूल कथा जितनी ही महत्त्वपूर्ण हैं, इसलिए 'गोदान' आज भी गंभीरता से पढ़े जाने की माँग करता है।

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Bundle Total Rs. 248

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Realistic Fiction, Social Drama Rural , Village Life Fiction, Literary Fiction, and Romance
Edition 1st
ISBN 9788119745548
Year 2025
Format Paperback
Pages 384
Language Hindi

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  • 5 stars: 12 (60%)
  • 4 stars: 7 (35%)
  • 3 stars: 1 (5%)
  • 2 stars: 0 (0%)
  • 1 star: 0 (0%)
s
sunil kumar
Good book

Page no 17 to 32 are duplicate.There are some mistakes in hindi words

v
vineet
Peak premchand

Classic hindi literature must readBook is great for the priceOriginal and great book

B
Bhavesh Bhiwgade
Hindi Med UPSC aspirant's 1st choice

Book is goated itself....Most popular hindi novel(उपन्यास)Packaging is great

A
Avinash Vishwakarma
Book

Book is very nice

D
Divyansh Sharma
Boring

Quality of book is best but the story is not a delightful read.

N
Noorul hasan
Good

Great thanks Amazon

S
Sreelekshmi
Very useful

Good

D
DILIPSINH
Must read

Good Quality

N
Neeta Rakhecha
Amazing

Cannot put this book in words..I just cried and cried after reading it. Ordered more books written by Munshi Premchand. He created interest in me to read Hindi literature.

S
Subhadeep Dey
Value for money

Good book

V
Vishalkumar
Great book

Great book

G
Gaurav singh katoch
Nice printing

Good print quality

P
Prem sagar
One of the Best story

Very interesting and emotional story. Premchy One of the best writers

K
Krishna Kumar vishwakarma
गोदान जीवन का सत्य

बहुत ही सुंदर। बार बार पढ़ने के बाद भी लगता है कि कुछ छूट गया । निश्चित रूप से इसकी तुलना नहीं हो सकती ।

B
Balvant singh
Godan

👍 Prosभारतीय ग्रामीण जीवन का अत्यंत यथार्थ चित्रण।किसान की समस्याओं और सामाजिक शोषण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।होरी और धनिया जैसे पात्र बहुत जीवंत और यादगार हैं।सरल भाषा में गहरे सामाजिक संदेश।हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में से एक।👎 Consकुछ पाठकों को कहानी की गति धीमी लग सकती है।सामाजिक और आर्थिक विषयों पर अधिक केंद्रित होने के कारण हल्के मनोरंजन की अपेक्षा रखने वालों को कम आकर्षित कर सकती है।कुछ घटनाएँ भावनात्मक रूप से भारी लग सकती हैं।निष्कर्षगोदान केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि उस दौर के भारतीय किसान के संघर्ष, सपनों और मजबूरियों का दस्तावेज़ है। प्रेमचंद ने समाज की विषमताओं, गरीबी और शोषण को इतनी सच्चाई से चित्रित किया है कि यह पुस्तक आज भी प्रासंगिक लगती है। हिंदी साहित्य में रुचि रखने वाले प्रत्येक पाठक को यह उपन्यास अवश्य पढ़ना चाहिए।

A
Anishika Singh
worth buying

my favourite book. and i get in best paper quality

B
BRIJ BIHARI CHAUBEY
गोदान

It's Amazing book. Everyone should read

S
Sushma tiwari
Good 👍

It's good book i think 🤔 read and think in alone you feel things real

M
Mukesh
ग्रामीण सभ्यता का यथार्थ वर्णन गोदान से बेहतरीन कोई उपन्यास नहीं

भारतीय ग्रामीण समाज और शहरी समाज दोनों की एक साथ यथार्थ वर्णन प्रभावशाली गोदान में ही दिखाई देता है

T
TARUN PANDEY
One of the finest novel to read about indian village lifestyle before independence

'गोदान' का होरी और 'रंगभूमि' का सूरदास दोनों ही छले गए पात्र हैं। एक को ज़मीदारों ने सूद के बोझ तले दबा दिया तो दूसरे को उसके घर से बेघर करने को कभी गाँव वालों ने साज़िश की तो कभी फैक्ट्री के मजदूरों के घर बनाने की ख़ातिर पॉड़ेपुर मोहल्ले की ज़मीन हथियाने के लिए पुलिस लगा दी गयी। होरी भरी दुपहरिया में काम करते हुए लू लगने से और कमज़ोर हो जाने के कारण अपनी जान से हाथ धो बैठा और उसकी गाय पालने की इच्छा पूर्ण न हो सकी वहीं सूरदास को मि. क्लार्क द्वारा गोली से मार गिराया गया। मृत्यु ही दोनों के जीवन में आराम ला सकीं। दोनों ही अपने से पहले दूसरों के लिए जान न्योछावर करते थे।गोदान एक किसान के अधूरे सपने की कहानी है , एक ऐसी पत्नी की कहानी है जिसने मरते दम तक अपनी मर्यादा नहीं त्यागी और सदा स्वाभिमान के साथ जीवन अर्पण किया। गोदान कहानी है एक ऐसे बेटे की जो अपने बाप का अधूरा सपना पूर्ण न कर सका और अंत में उसके पास देने को सिर्फ़ और सिर्फ़ सांत्वना ही बचा। गोदान को पढ़ते हुए गाँव का सामाजिक परिवेश खुल कर सामने आता है, लोगों के मन में निहित भ्रष्टाचार और भारतीय समाज में व्यापक ज़मींदारी प्रथा के बारे में पता लगता है। गोदान उपन्यास को आप दो भागों में विभाजित कर सकते हैं एक ग्रामीण परिवेश और दूसरा शहरी परिवेश। ग्रामीण परिवेश में आप होरी का संघर्ष देख पायेंगे, गाँव में फैली छुआछूत की बीमारी महसूस कर पायेंगे, ज़मींदारी प्रथा से रूबरू हो पायेंगे, भारतीय समाज की शादी शुदा गृहस्थी को कैसे चलाया जाता है उसका एक सजीव चित्रण देखने को मिलेगा और साथ ही गाँव में मौजूद अशिक्षा देखने को मिलेगी।वहीं शहरी परिवेश में मुख्य किरदार मेहता और मालती की कहानी आप की आँखें नम कर देंगी। आप देखेंगे कि किस तरह डॉक्टर मालती कहानी के आरंभ में एक रसभरी पुष्प की भांति कितने ही मधुमखियों को अपनी और आकर्षित करती है लेकिन अंत में उसका पूरा चरित्र ही बदल जाता है और वो मेहता के संपर्क में आने के कारण जन सेवा में लीन हो जाती है। आप को मिस्टर तंखा जैसे मक्कार दिखेंगे जो दो दोस्तों में लड़ाई लगवा कर अपना उल्लू सीधा करते हैं। आप को मिस्टर खन्ना और गोविन्दी के गृहस्थ जीवन में झाँकते हुए आप को पता लगेगा कि जब दूसरी लड़कियों से भाव न मिला तो वे लौट कर अपनी पत्नी के पास आये और उनकी महानता को स्वीकार किया।आज के परिप्रेक्ष्य में अगर आप देखेंगे तो पायेंगे कि मेहता के भाषण और उनके वैचारिक दृष्टिकोण महिलाओं को घर के कामों में व्यस्त रखने के पक्ष में थे। वे पूर्ण रूप से तो स्त्री जाति से द्वेष नहीं करते थे परन्तु अपने दिमाग़ में इस बात को स्पष्ट रूप से रेखांकित कर चुके थे कि जीव जन्तुओं को पालने का काम बहुत बड़ा काम है और साक्षात महानता का पर्याय है जो सिर्फ़ स्त्री कर सकती है इस कारण उनका चुनाव घर पर रह कर परिवार संभालने के लिए हुआ है। उन्हें स्त्री में त्याग, धैर्य, परोपकार जैसे गुण बहुत ज़रूरी नज़र आते थे। इसके विपरीत मालती की बहन सरोज इस बात को ग़लत मानती थी और स्त्रियों के काम काज का क्षेत्र बढ़े इसपर जोर देती थी।धनिया अपने समय से आगे का सोचती है। वो सिर्फ़ अपनी जाति के लिए नहीं पूरी मानव जाति के लिए एक मिशाल है। उपन्यास में अनेक जगह ऐसे प्रसंग मिले जिसने इस बात पर मोहर लगा दी जैसे झुनिया का गर्भवती होने के उपरांत उसने उसे अपने घर में सिर्फ़ जगह ही नहीं दी बल्कि उसका पालन पोषण किया और पूरे गाँव वालों से लड़ गयी कि जाति वाले बिरादरी वाले हमें अलग करते हैं तो करें हम मानवता नहीं त्याग सकते हैं। उसने सिलिया चमारिन को भी अपने घर में पनाह दी और बार बार बताया कि वो जातिवादके चँगुल में नहीं फँसी है।/ तरुण पाण्डेय