Skip to product information
 
                
Exclusive Tyndale.com Preview
           
          
       
         

Information

                 
       
         

Add additional descriptions, sizing guides, or brand info here.

       
     
   
 

Hindi Satire & Humour Book Set – 3 Books | Nitshay Ki Kutai, Vyang Ke Naye Chehre & Paavati Kaun Dega

Rs. 388
Rs. 647
Save 40%
In Stock

Nitshay Ki Kutai - हँसते-फुसफुसाते अंदाज़ में अपनी बात कहती ये कहानियाँ भीतर से कम गंभीर हों, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। सर्वस्वीकृत बातों को अपने बेपरवाह अंदाज़ में ख़ारिज करता हुआ ‘नीत्शे’ हो या अपने छोटे-से लोक में देश की रक्षा का भार उठाए मासूम चायवाला ‘एजेंट संतोष’-ये सभी चरित्र और उनकी कहानियाँ ग्रामीण और कस्बाई मध्यवर्ग के भीतर से आती हैं और लोक के सहज हास्यबोध तथा अन्यथा अलक्षित चालाकियों को भी सामने लाती हैं। ये कहानियाँ नई पीढ़ी के पाठकों के लिए, उन्हीं के बीच से निकलकर आए लेखक की ओर से आई हैं; इसलिए ये अपनी कहन में आधुनिक, बेबाक और मनोरंजक हैं। बहुसंख्यक समाज में स्वीकृत स्त्री-द्वेष हो या मीडिया का पतन, विवाह को नष्ट करने को आतुर झगड़ालू फूफा हों या प्रेम में निरंतर छली जा रही स्त्री-मयंक इनकी कहानियों को गतिमान और पाठक को उत्सुक बनाए रखने में सफल रहते हैं।

Vyang Ke Naye Chehre - व्यंग्य, समकालीन विसंगतियों से लड़ने का सबसे सक्षम भाषिक प्रयोग है। इसमें हिंदी के युवा व्यंग्यकारों की ताज़ा अभिव्यक्तियाँ हैं। शिवम् चौकसे धार्मिक आस्था और पाखंड के पीछे अनिवार्यतः मौजूद रहने वाले क्षद्म को बेपर्दा करते हैं। उन्हें पढ़ते हुए परसाई जी की रचना 'वैष्णव की फिसलन भी याद आएगी। व्यंग के नये चहरे पूर्णिमा, अस्मिता मौर्य और अर्चिता सावर्ण्य को पढ़ते हुए इस बात पर ध्यान जाना चाहिए कि हिंदी व्यंग्य विधा में स्त्रियों की संख्या कितनी कम है। उस लिहाज से इस संकलन में तीन महिला व्यंग्यकारों का नाम अपर्याप्त होकर भी उल्लेखनीय कहा जाएगा। इन तीन युवा व्यंग्यकारों की शैली कथात्मक है। संजय गोरा खेल विधा को प्रभावी ढंग से व्यंग्य और विनोद में बदल देते हैं। शीतल रघुवंशी, चिराग अग्रवाल, दीपेश और सचिन शर्मा किंचित कथात्मकता, गल्प और मुहावरों का प्रभावी इश्तेमाल करते हैं। प्रिय युवा व्यंग्यकारों में सबसे प्रतिष्ठित नाम है। उनका व्यंग्य पढ़ते हुए इसका कारण भी समझ आएगा।

Paavati Kaun Dega - प्रिय का सधा हुआ चमकदार गद्य उनके व्यंग्य को वह ज़रूरी धार मुहैया कराता है जिसकी अनुपस्थिति में इस तरह के लेखन के सामने दोहराव का जोखिम बना रहता है। उनके लेखन में जीवन से सीधी मुठभेड़ करते आमजन के लिए स्पष्ट प्रतिबद्वता तो नज़र आती ही है, उनके अध्ययन के विस्तृत और दिलचस्प दायरे की झलक भी मिलती है। वे बड़ी आसानी से भाषा और शैलियों के अलग-अलग रास्तों में आवाजाही करना जानते हैं और उनकी चपल और संवेदनशील दृष्टि चीज़ों के आरपार देखने का हौसला रखती है। प्रिय का यह पहला संग्रह समकालीन साहित्य में उनकी मजबूत उपस्थिति को दर्ज करेगा। -अशोक पाण्डे प्रिय हिन्दी व्यंग्य की उम्मीद हैं। उनके लेखन में राजनीतिक जुमलों से भरमाने वाली अभिव्यक्ति नहीं बल्कि उससे आगे निकलता सहज परिहास है। बीते अनेक दशकों से व्यंग्य के नाम पर बौद्विक कुण्ठा परोसी जा रही थी। कभी-कभी कुण्ठा के ऐसे ही प्रस्तुतिकरण को राजनीतिक चेतना भी कह दिया जाता रहा है। प्रिय की लिखत में सिर्फ राजनीति नहीं, हमारे आसपास का आम परिवेश है। प्रिय, तुम ‘पारसाई’ से बचते हुए हमाम की हलचल बताते रहो।

Frequently Bought Together

Recommended products for this item

Bundle Total Rs. 388

Check delivery availability

Book Details

Genre Humor & comedy
Year 2026
Pages 464
Language Hindi

Explore author

More from Mayank Jain Parichha

View all

No other books by this author were found.

You may also like

Explore publisher

More from Combo_Set

View all