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Karmyog | कर्मयोग

Yuvaan Books

Rs. 179
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वेदान्त का सबसे उदात्त तत्त्व यह है कि हम एक ही लक्ष्य पर भिन्न-भिन्न मार्गों से पहुँच सकते हैं। स्वामी जी ने इन्हें साधारण रूप से चार मार्गों में विभाजित किया है- कर्ममार्ग, भक्तिमार्ग, योगमार्ग और ज्ञानमार्ग । परन्तु वे इन्हें बिल्कुल पृथक्-पृथक् विभाग नहीं मानते। वे कहते हैं कि ऐसी बात नहीं कि तुम्हें कोई ऐसा व्यक्ति मिले, जिसमें कर्म करने के अतिरिक्त दूसरी कोई शक्ति न हो, अथवा जिसमें केवल भक्ति या केवल ज्ञान के अतिरिक्त और कुछ न हो। ये विभाग उन्होंने केवल मनुष्य की प्रधान प्रवृत्ति अथवा गुण प्राधान्य के अनुसार किये हैं। ये सब मार्ग एक ही लक्ष्य में जाकर एक हो जाते हैं।
इसमें एक रास्ता है-कर्मयोग । स्वामीजी का यह ग्रंथ 'कर्मयोग' मानव जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण और व्यावहारिक विषय पर आधारित है-काम करने का सही ढंग और उसका आंतरिक दर्शन । यह पुस्तक हमें सिखाती है कि कैसे हम अपने दैनिक कर्त्तव्यों का पालन करते हुए भी मानसिक शांति, स्वतंत्रता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Religion & spirituality
Edition 1ST
ISBN 9788169235341
Year 2026
Format Paperback
Pages 192
Language Hindi

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