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Kisse Local Ke | क़िस्से लोकल के By Rekha Suthar

Rs. 224
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मुम्बई लोकल, उस महानगर की जीवन रेखा है। ट्रेन के भीड़ भरे डिब्बों के भीतर जैसे कई संसार पटरियों पर फिसलते हैं, स्टेशनों पर विराम लेते हैं और कभी थके हुए, कभी ख़ुशी भरे क़दमों से घर लौटते हैं। लोकल की यात्राएं बहुत लम्बी नहीं होतीं। थोड़े ही समय की इन यात्राओं के दौरान, टूटने-बिखरने, प्यार, हिंसा और करुणा के दृश्य और छोटे लेकिन ज़रूरी सबक मिलते-दिखते रहते हैं। रेखा सुथार ने पहियों पर चलती इस ज़िन्दगी को बड़ी शिद्दत से महसूस किया है और एक सहज भाषा में दर्ज किया है। जेबकतरे हों या मोची, किशोर प्रेमी जोड़े हों या किन्नर, बूढ़े - बूढ़ियाँ हों या थके हुए सेल्समैन; रेखा इन्हें बगैर पूर्वग्रह के और बड़ी सहृदयता से दर्ज करती हैं। यह भी इन कथाओं की ताक़त है।

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Literature, Young adult, and Sci-fi
Edition 1ST
ISBN 9788169235228
Year 2026
Format Paperback
Pages 184
Language Hindi

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R
Raj kumar
लघु कहानियों से सजा सुंदर संग्रह

किताब : किस्से लोकल के (लघु कहानी संग्रह)लेखिका : रेखा सुथारप्रकाशन : युवान बुक्स (अंबाउड का उपक्रम)प्रथम संस्करण : 2026कुल पृष्ठ : 182ज़िंदगी की एक लंबी कहानी में छोटे छोटे किस्से उस कहानी को अपनी तरह से निखारने का काम तो करते ही है साथ ही ज़िंदगी का कुछ बोझ भी हल्का कर जाते है कभी कभी। ऐसे ही कुछ आत्मीयता से भरे और किसी पेंटिग पर रंगों की तरह बिखरे हुए किस्सो का पिटारा है रेखा सुथार द्वारा लिखी यह किताब "किस्से लोकल के" जो उनकी मुंबई की जान कही जाने वाली लोकल ट्रेन के सफर में जिये हुए पलों का संग्रह है। ज़िंदगी में जैसे तमाम तरह के लोगों, सुख, दुःख और अनुभवों से गुज़रना होता है ठीक वैसे ही इस संग्रह में भी आपकों मुंबई शहर और उसके लोगों से जुड़ी हुई कई लघु कहानियाँ पढ़ने को मिलती है। कहानियों में आपकों बहुत कम शब्दों में ज़िंदगी की खूबसूरती से लेकर आम लोगों की मुश्किलों तक के बारे में छोटी छोटी बातों से महसूस करने को मिलेगा। कहीं आपको प्रेम में डूबे रिश्ते पढ़ने को मिलते है , तो कहीं थपकियों सी हल्की फुल्की नोक झोक देखने को मिलती है। कुछ कहानियों में मुंबई की रफ़्तार भरी ज़िंदगी में थम कर सुकून की साँसे लेते किरदारों का अकेलापन देखने को मिलेगा तो कहीं नौकरी और सपनों के बीच सब कुछ मैनेज करने की कोशिश करते हुए किरदार मिलेंगे। ये सभी कहानियाँ कुछ बहुत बड़ा सीखने या बताने की कोशिश ना करते हुए ज़िन्दगी को बेहद सुंदर और संवेदनशील तरीक़े से छूने की कोशिश ज्यादा लगती है। हालांकि हर कहानी को लेखिका ने अपने नज़रिए से लिखा है मगर अनुभवों को इतनी सरल भाषा में लिखा है कि आप भी अपने अनुभवों को यादों में टटोलने लगते है कि हां एक कहानी मैने भी ऐसी महसूस की थी कभी अपने सफर में, जो कि इस संग्रह को और खूबसूरत बनाती है। पाठकों के लिए इसे पढ़ना जितना आसान है उतना ही रिलेटेबल भी है। आप यक़ीनन इसे पढ़ते हुए कहीं थकान महसूस नहीं करते और एक बार में चाहे तो पूरा ख़त्म कर लेंगे। कमियों की बात करें तो लेखन में कहीं कहीं दोहराव देखने को मिलता है जो कुछ कहानियों के बाद थोड़ा अखरता हैं। बाकी पूर्ण रूप से कहां जाए तो किताब पढ़कर आप भी अपने सफर के किस्से को याद ज़रूर करेंगे। रेखा सुथार जी को उनकी इस किताब के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।- साहित्ययात्री(२४/०६/२०२६)