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Lucknow Arey tauba | लखनऊ अरे तौबा By Alok Mishra

Rs. 199
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लखनऊ जितना नवाबों के लिए जाना जाता है उतना ही शायरों के लिए भी। पर उस दिन के बाद ये शहर टैक्सी ड्राइवर शरद सिंह के लिए भी जाना जाने लगा । क़िस्मत ने ऐसा खेल खेला कि इस एक अकेले के पीछे शायराना शहर के सारे धुरंधर पड़ गये । जैसे चाहने वाले मीर की कब्र ढूढ़ते हैं वैसे मारने वाले शरद सिंह को ढूढ़ रहे थे । किसी ज़माने में इसी लखनऊ की गलियों में अपनी मोहब्बत के हाथों में हाथ डाले शरद नवाबों की तरह घूमता था । और अब हाल ये था कि जान बचाने के लिए मारा-मारा फिर रहा था । दिन जवानी के थे और दौर मुसीबतों का। वो वक़्त कुछ और था जब शरद किसी का जान-ए-जिगर हुआ करता था। अब जो थे वे जानी दुश्मन थे। बीते दिनों पिताजी शरद से लखनऊ छुड़वाना चाहते थे और शरद ने मना कर दिया था। पर हालात ने शरद को ऐसे मोड़ पे खड़ा कर दिया था कि वो हर साँस साँस में कह रहा था- लखनऊ अरे तौबा !

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Bundle Total Rs. 199

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Literature, Contemporary Literature, humor, Short Story Collection, Crime & mystery, and Thriller & suspense
Edition 1st
ISBN 9788197664571
Year 2024
Format Paperback
Pages 172
Language Hindi

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1
1907AD
शानदार मिस्ट्री👌

आज Alok Mishra भाई की नई किताब "लखनऊ अरे तौबा" भी पढ़ ली। कल काशी एक्सप्रेस जैसी शानदार लव् स्टोरी पढ़ने के बाद एक फ़ास्ट थ्रिलिंग सस्पेंस मर्डर मिस्ट्री पढ़ना मतलब एक अलग ही एक्सपीरियंस था।Unbound Script से प्रकाशित यह किताब एक टैक्सी ड्राईवर शरद की जिंदगी के इर्दगिर्द घूमती है जो एक महिला को अपनी कार में बिठाता है और वह गंतव्य पर पहुंचने पर उसे मृत मिलती है। और यही से उसकी जिंदगी की वाट लगनी शुरू हो जाती है। आखिर तक शरद का क्या होता है यह आपको किताब पढ़कर ही पता चलेगा।कहानी का पेस और सस्पेंस गजब का है अंत तक आते-आते आप खुद को रोक नही पाएंगे। एक जबरदस्त मिस्ट्री और एक्शन का रोलर कॉस्टर है यह किताब। व्याकरण की कुछ गलतियों को इग्नोर किया जाये तो कहानी के लिए काफी रिसर्च की गयी है और तथ्यों को काफी अच्छे तरीके से दिखाया गया है। घटनाएं बहुत तेजी से घटती है और आपको सोचने का समय नहीं देती।मेरा भी मन था कि ऐसा कुछ लिखूँ और इस किताब ने मुझे प्रेरित करने में वह सहायता की। सत्य व्यास जी की लकड़बग्घा के बाद इस जोनर की बहुत दिनों बाद ऐसी कोई किताब पढ़ी है जो शुरू से एन्ड तक बाँधे रही और एक लेखक के तौर पर बहुत कुछ सिखाया भी। उम्मीद है आप सभी को भी पसंद आएगी।😁

t
travelernmore
वह किताब छोटी लगने लगती है, जो अच्छी लिखी गई है।

”Lucknow Are Tauba” by Alok Mishra is a mesmerising blend of poetic prose and profound storytelling. Each page invites readers into a world filled with emotional depth, where themes of love, loss and self-discovery are explored with a quiet, beautiful intensity. The characters feel deeply alive, their journeys so intricately crafted that they stay with you long after the final chapter. This is a book that speaks to the soul, a gentle reminder of the beauty and complexity within us all. An unforgettable read.

I
Idris
Best author

Dost ki hai leni pdhi. Pdhi nhi Abhi tak lekin pdh lungi. Ek baar bas shirtless foto bhej do voh mujhe 🤤😘

D
Deepak
Thrill Suspance and Plot

आलोक मिश्रा की ये किताब लखनऊ की गलियों से होते हुए कब आपके दिमाग में घर बना लेती इसका अंदाजा आपको किताब पढ़ने के बाद ही होगा। फिल्म के किसी scene की तरह किताब हर मोड़ पर आपको रोमांचित करती है। लेखक को बधाई। और पाठकों के लिए - जरूर पढ़िये मजा आएगा