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Jamunapaar Wali Muhabbat | जमुनापर वाली मोहब्बत By Sharad Tripathi

Rs. 254
Rs. 299
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एक अनूठी प्रेमकहानी जो जमुना की लहरों पर चलती नाव पर चुपचाप परवान चढ़ती और हालात के हाथों टूटती बिखरती रही.. जुड़ते-टूटते-बिखरते रहे मुहब्बत भरे दिल, उनके कोमल सपने और उनके आसपास का जीवन. चंदर, संध्या और मैरी की मार्मिक प्रेमकहानी जो जमुना के दो किनारों के बीच भी उतनी ही बिखरी हुई है जितनी कुम्भ और इलाहाबाद के आंतरिक संसार में. चंदर! क्या यह नाम अधूरी मुहब्बत और टूटा हुआ दिल थामे संगम के पास उदास छूट जाने के लिए शापित है?

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Romance, Literature, Contemporary Fiction, Literary Romance, and Emotional Drama
Edition 1st
ISBN 9788199169494
Year 2025
Format Paperback
Pages 256
Language Hindi

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  • 5 stars: 5 (100%)
  • 4 stars: 0 (0%)
  • 3 stars: 0 (0%)
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  • 1 star: 0 (0%)
J
Jhankaar
Highly recommend

कुछ कहानियाँ काग़ज़ पर नहीं लिखी जातीं ,वो शहरों की मिट्टी, नदी की लहरों और दिलों की धड़कनों में बसती हैं। जमुनापार वाली मोहब्बत उन्हीं में से एक है।एक लड़का…जो अपनी संध्या से मोहब्बत भी करता रहाऔर जिम्मेदारियाँ भी उठाता रहा।जिसके सपनों में थोड़ी धूप, थोड़ी छाँव थी…और साथ था कोतवाल सिंह जैसा दोस्त जिसके होते ज़िंदगी कभी सच में मुश्किल लगी ही नहीं। फिर एक दिन Marry ‘बिजली’ की तरह आई…और चंदर के दिल को एक मीठा-सा दर्द देकर और भी परिपक्व बना गई। कितना सच है—लड़के अक्सर चुपचाप ही समझदार हो जाते हैं। इस कहानी में हर संवाद ऐसा लगा जैसे किसी फ़िल्म का सीनधीरे-धीरे मेरी आँखों के सामने खुलता जा रहा हो।किरदारों की गहरी बातें, उनके कटाक्ष, उनकी खामोशियाँ…सब कुछ इतना असल लगा कि पढ़ते-पढ़ते ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं अपनी ही ज़िंदगी के पन्ने पलट रही हूँ। और हाँ…अगर आपने Gunahon Ka Devta पढ़ी है तो इस कहानी की मोहब्बत, तड़प और मजबूरियाँ आपके दिल को और भी गहराई से छू जाएँगी।कभी-कभी दर्द भी अच्छा लगता है…जब वो किसी सच्ची मोहब्बत की कहानी से मिले।इस दास्तान को पढ़िए—हो सकता है आपका दिल भी यहीं कहीं अपना सुकून पा ले। jhankaar ❤️

T
Tanuj
This story just flows!

All I'm going to say is that I finished it the same day I opened the book. It's that captivating.

K
KOSHLENDRA MISHRA
पढ़ी जानी चाहिए

जमुना पार वाली मोहब्बत पढ़ते हुए लगता है जैसे किसी पुराने शहर की शाम, चाय और अधूरी यादें एक साथ चल रही हों।

R
Rinkal vadoliya(author)
अधूरी कहानी का ये सफर बहुत ही दिलचस्प है।must read book

मोहब्बत में हारे लोग अक्सर खुद को हारने के बावजूद जीत जाते है।प्यार की खुशिया चाहे कितनी बडी हो, पसंदीदा इन्सान ना मिलने पर हम हार जाते है,खुद को भी..दिल को भी...

S
Samay
LOVED IT.. !!

भाई, ये किताब पढ़कर सच में दिल खुश हो गया। इलाहाबाद की मिट्टी, गंगा-जमुनी तहज़ीब और प्यार की इतनी प्यारी कहानी कम ही पढ़ी है।कहानी का नायक चंदर है — एक मल्लाह का लड़का, जो नाव चलाते-चलाते अपनी जिंदगी की राह ढूँढ़ता है। कहानी दो टाइम में बँटी है — 2003 और 2013।2003 में चंदर की मुलाकात होती है संध्या से। Sandhya school जाने वाली लड़की है और St. Mary’s में पढ़ती है। उसकी मासूमियत, स्कूल की छोटी-छोटी बातें और अपनापन उसे बहुत खास बनाते हैं। यही वजह है कि चंदर की पहली मोहब्बत इतनी यादगार हो जाती है।2013 में चंदर की जिंदगी में आती है मैरी, जो फ़्रांस से आई है। उसे हिंदी नहीं आती, अंग्रेज़ी नहीं आती, सिर्फ़ फ़्रेंच आती है। और चंदर को भी सिर्फ़ हिंदी आती है, अंग्रेज़ी और फ़्रेंच नहीं। मतलब, दोनों एक-दूसरे की भाषा नहीं समझते, लेकिन प्यार नज़रों, एहसासों और छोटे-छोटे इशारों से बन जाता है। ये हिस्सा पढ़कर सच में मज़ा आता है।कहानी की पृष्ठभूमि में है महाकुंभ, इलाहाबाद के घाट, भीड़ और आस्था — सब कुछ ऐसा लिखा गया है कि जैसे आप वहीं खड़े हों।और हाँ, कहानी में धर्मवीर भारती के उपन्यास “गुनाहों का देवता” का बड़ा रोल है। लेखक ने बड़ी चतुराई से उनके references और उनके नजरिए को कहानी में पिरोया है, जिससे कहानी और भी गहरी, भावुक और इलाहाबादी लगती है।और मज़ा आता है कोतवाल सिंह वाले हिस्से में। उसकी कॉमिक टाइमिंग और हाज़िरजवाबी पूरे माहौल को हल्का और मजेदार बना देती है।सच में, ये किताब हँसाती भी है, रुलाती भी है और दिल को गुदगुदाती भी है।प्यार, वक्त और तक़दीर की इतनी प्यारी कहानी बहुत कम पढ़ने को मिलती है।