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Mai Behoshi Ka Ek Patthar Tha | मैं बेहोशी का एक पत्थर था By Veeru Sonkar

Rs. 224
Rs. 249
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अपने दूसरे कविता संग्रह में वीरू सोनकर थोड़ी अप्रत्याशित परिपक्वता के साथ सामने आ रहे हैं। उनकी कविता में अदम्य आवेग, अपने समय और सभ्यता के रूपों-विद्रूपों और सौन्दर्य और अन्याय की बेरहम शिनाख्त, भाषा और कविता में तेज़ी से फैल रहे रूमानों से अपने को अलग करने की सजगता, बाहर और भीतर के तादात्म्य की अवसन्न पहचान अब पूरी प्रखरता और नवाचार में जाहिर हैं। उनमें दुस्साहस है पर उनकी कविता को मार्मिक विलाप की तरह पढ़ा जा सकता है। अपनी कविता में वे अपनी और आज की सचाई का सामना करने से नहीं हिचकिचाते और कभी अपने क्षोभ में कविता को गाली तक बनाने की हद तक चले जाते हैं। जो भी हो, वे एक भरेपूरे कवि हैं जो उनके एक क्षुब्ध, संवेदनशील, साहसी, सजग आदमी होने का ही एक संस्करण है। वीरू के यहाँ सहना और भाषा दोनों जब-तब कलंक बन जाते हैं। ऐसा भी लग सकता है कि हमारे समय में लगातार हो रहे विध्वंस के बरक्स वे भग्नावशेष में भटकते कवि हैं । यह कविता हमें पुकारती है, हमारे और अपने किये धरे पर विलाप करती है, हमें अनेक विद्रूप और विडम्बनाओं की चिन्हार कराती है, हमें भाषा में नये इलाकों में ले जाती है और हमें आश्वस्त करती है कि इस अभागे समय में भी कविता कुछ कर सकती है। अशोक वाजपेयी प्रसिद्ध साहित्यकार

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Literature, Poetry, Contemporary Fiction, Literary Poetry, Social Poetry, and Literary Fiction
Edition 1st
ISBN 9789347125966
Year 2025
Format Paperback
Pages 160
Language Hindi

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P
Pooja
वीरू सोनकर हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि हैं

वीरू सोनकर हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि हैं जिनकी कविताएं समकालीन समय के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों को हल ही नहीं करती,पाठक को बेचैन करती हैं और इस बेचैनी के अपने मायने हैं...यह कविताएं कई पाठ की मांग करती हैं, इन्हें बार बार पढ़ा जाना चाहिए...।

V
Veeru sonker
नई कविताएं

किताब पर हर जरूरी संवाद का स्वागत है