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Amavas Mein Jugnoo | अमावस में जुगनू

Rs. 224
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गणित के प्रोफ़ेसर रहे कुमार विनोद की यह पृष्ठभूमि उनकी ग़ज़लों में भी झलकती है। एक गणितज्ञ जब शायरी करेगा तो यक़ीनन सब कुछ नपा-तुला होगा। कुमार विनोद की इन ग़ज़लों में शब्दों का चुनाव, क़ाफ़िये और रदीफ़ एकदम सधे और नपे-तुले हुए हैं। इस संग्रह की ग़ज़लों में इस्तेमाल हुए क़ाफ़िये अगर लाजवाब करते हैं, तो तनिक हटकर के लिए गये रदीफ़ अचंभित । मौलिक बिंबों वाली इन ग़ज़लों का टटकापन हैरत में डाल देता है । कुमार विनोद सिर्फ़ मिज़ाज ही नहीं, ग़ज़लों का शऊर भी बख़ूबी पहचानते हैं। एक निहायत नये मुहावरे और अंदाज़ के साथ वे इस संग्रह की ग़ज़लों में जहाँ एक ओर जीवन के विराट फ़लक की पृष्ठभूमि में उत्सवधर्मिता के विविध रंगों को रूपायित करते हैं, तो वहीं दूसरी ओर इन ग़ज़लों में सामाजिक सरोकार भी बड़े सलीक़े के साथ अभिव्यक्त हुए हैं । इन ग़ज़लों में अनेक अश' आर ऐसे हैं जो हमारे मेमरी कार्ड पर दर्ज हो जाते हैं। कई बार अंदाज़ सवाल-जवाब का होता है। कुमार विनोद अपने पाठकों को किसी ऊँचे डायस पर चढ़कर संबोधित नहीं करते बल्कि अगल-बगल बैठकर कुछ कहते और कुछ सुनते-से लगते हैं।

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Poetry, Social Poetry, Poetry Criticism , and Ghazal Collection
Edition 1ST
ISBN 9788169235303
Year 2026
Format Paperback
Pages 136
Language Hindi

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A
Anonymous

writing is awsome we love your gajals vinod ji.....