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Rangbhoomi | रंगभूमि By Munshi Premchand

Rs. 404
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अंधे भिखारी सूरदास के पास एक ज़मीन है, जो पूरे गाँव के पशुओं की चारागाह है। जॉन सेवक उसपर सिगार का कारखाना लगाना चाहता है। अकेला सूरदास गाँव के लिए उस ज़मीन को बचाने की लड़ाई लड़ता है। इस लड़ाई में वह राजा, पूंजीपति, गाँव के षड्यंत्रकारियों और शहरी न्यायतंत्र से लड़ता हुआ शहीद होता है। यह संक्षिप्त कथा 'रंगभूमि' के जटिल और विस्तृत वितान का संकेत मात्र है। इसके साथ-साथ निर्मम अंग्रेजी सत्ता - व्यवस्था है और समाज में बदलाव की उठती गिरती लहरें है, और मनुष्यों के प्रतिक्षण बदलते हृदय। नैतिक और अनैतिक की बहसों के बीच प्रेमचंद की मँजी हुई लेखनी सब कुछ दर्ज करती चलती है।

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Literature, Historical fiction, Drama, History, Literary Fiction, Social & Political Thought, and Philosophical Fiction
Edition 1st
ISBN 9788119745203
Year 2026
Format Paperback
Pages 576
Language Hindi

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