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Nirmala | निर्मला By Munshi Premchand

Rs. 248
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मुंशी प्रेमचंद हिन्दी उपन्यास को जासूसी, अय्यारी और पौराणिक कथानकों से निकालकर वास्तविक सामाजिक विषयों तक ले आये। इसमें उनका केन्द्रीय प्रश्न हमारे समाज की आधारी आबादी, यानी की स्त्रियों की समस्याएं थीं। आज आपको शायद यह बात उतनी बड़ी न लगती हो, लेकिन साहित्य में यह एक बड़ा प्रस्थान है। इसके बाद हिन्दी उपन्यास पीछे नहीं लौट सकता था । कथाकार सामाजिक और व्यक्तिमन की हलचलों से मुख नहीं मोड़ सकते थे। निर्मला में प्रेमचंद अनमेल विवाह को विषय बनाते हैं और उसे करुणा की जिस जमीन तक ले जाते हैं, उससे गुजरते हुए आँखें गीली होने लगती हैं । वह मनुष्य के संदेह, संशय और मनोसंघर्ष को जितनी सहजता से भाषा में प्रत्यक्ष करते हैं, इससे पाठक न सिर्फ़ कथा पत्रों से जुड़ता है बल्कि खुद के भीतर भी उतरता है ।

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Book Details

Publisher Yuvaan Books
Genre Literature, Romance, Literary Fiction, Social Realism, Women-centric Fiction, Social & Psychological Fiction , and storytelling for young readers.
Edition 1st
ISBN 9788119745685
Year 2026
Format Paperback
Pages 192
Language Hindi

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V
Vivek Sabbarwal
Good

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